गणेश चतुर्थी का महत्व

गणेश

काजल मौर्य- गणेश चतुर्थी भारत में बड़े ही धूम-धाम और उत्साह के साथ मनाए जाने वाला पर्व है। भारत में हर साल गणेश चतुर्थी के अवसर पर बाजारों में खुब रौनक और चहल-पहल दिखाई देती है। गणेश चतुर्थी हर साल अगस्त या सितंबर माह में मनाया जाता है और यह हिन्दुओं का एक बहुत ही महत्वपूर्ण त्योहार है। गणेश चतुर्थी को गणेश जी के जन्मदिवस के रूप में हर वर्ष जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है और यह केवल एक ही दिन नहीं बल्की अगले 11 दिनों तक चलने वाला त्योहार है। यह त्योहार यूं तो पूरे भारतवर्ष में मनाया जाता है पर इसकी रौनक महाराष्ट्र और कर्नाटका में ज्यादा दिखाई देती है। श्री गणेश बुद्धि और समृद्धि के भगवान् हैं और रिद्धि-सिद्धि के स्वामी। रिद्धि- सिद्धि भगवान् गणेश की पत्नियों का नाम है। श्री गणेश देवताओं में पूजे जाने वाले प्रथम देव हैं इसलिए किसी भी पूजा या शुभ कार्यों में किसी भी देवता को पूजने से पहले भगवान् श्री गणेश को पूजा जाता है। यूं तो गणेश भगवान् अलग-अलग नामों से जाने जाते हैं , जिनमें से कुछ नाम हैं -विघ्नहर्ता – इस नाम का अर्थ है सबके दुखों और बाधाओं (विघ्नों) को हरने या दूर करने वाला। क्योंकि श्री गणेश हर साल लोगों के घर विराजते हैं और जाते समय उनके सारे विघ्न अपने साथ लेजाते हैं इसलिए यह विघ्नहर्ता के नाम से भी जाने जाते हैं।लंबोदर – लंबोदर का अर्थ है बड़ा (विशाल) पेट वाला। क्योंकि भगवान् श्री गणेश खाने के बहुत शौकीन हैं और इनका पेट विशाल है इसलिए यह लंबोदर के नाम से भी जाने जाते हैं।एकदन्त – क्योंकि भगवान् श्री गणेश जी का एक ही दांत हैं इसलिए यह एकदन्त के नाम से भी व्यापक हैं।गजानन – क्योंकि श्री गणेश का मुख हाथी का है इसलिए इन्हें गजानन भी कहते हैं।गणपति – गणपति का अर्थ है सभी गणों के स्वामी, क्योंकि श्री गणेश सभी गणों से पहले पूजे जाते हैं इसलिए इन्हें गणपति भी कहते हैं।देवव्रत – देवव्रत का मतलब है सबकी तपस्या स्वीकार करने वाला, क्योंकि श्री गणेश सबकी तपस्या स्वीकार करते हैं इसलिए सभी इन्हें प्यार से देवव्रत भी पुकारते हैं।हर साल लोग बड़े ही उत्साह, प्यार और भक्ति भाव से गणेश जी को अपने घर लाते हैं और अपनी श्रद्धा अनुसार उन्हें एक दिन, तीन दिन, पांच दिन, सात दिन या ग्यारह दिन पर विसर्जित कर देते हैं। इस साल गणेशा चतुर्थी 31 अगस्त यानी बुधवार को है और अनंत चतुर्दशी 9 सितंबर को। गणेश चतुर्थी के अवसर पर भगवान् को घर लाने और स्थापित करने का भी शुभ मुहूर्त होता है, और मूर्ती की स्थापना हमेशा सही मुहूर्त और सही दिशा में करनी चाहिए। गणेश चतुर्थी के अवसर पर मूर्ती स्थापित करने के बाद भगवान की विधिवत् पूजा अर्चना की जाती है और उन्हें भोग लगाया जाता है। भगवान् गणेश का प्रिय भोग है मोदक, भगवान् इसे बड़े ही प्रेम से खाते हैं, पर लोग अपनी भक्ति और श्रद्धा के अनुसार भगवान् को बेसन के लड्डू , बूंदी के लड्डू या मोतीचूर के लड्डू का भोग भी लगा सकते हैं।

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