वेतन वृद्धि के लिए हिंसक प्रदर्शन की जांच करेगी एसआईटी, जल्द और गिरफ्तारियां संभव
रामशंकर, ग्रेटर नोएडा
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में 13 अप्रैल को हुए श्रमिकों के हिंसक प्रदर्शन ने प्रशासन और पुलिस के लिए गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। अब इस पूरे मामले की तह तक जाने के लिए गौतमबुद्ध नगर पुलिस ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि एसआईटी के गठन से जांच में तेजी आएगी और साजिश के हर पहलू का खुलासा संभव हो सकेगा।
एसआईटी का नेतृत्व एडीसीपी स्तर के अधिकारी को सौंपा गया है, जबकि इसमें 10 से अधिक अनुभवी पुलिसकर्मी शामिल हैं। यह टीम अब तक दर्ज सभी मुकदमों की बारीकी से जांच करेगी और अपनी विस्तृत रिपोर्ट पुलिस कमिश्नर को सौंपेगी। पुलिस का स्पष्ट कहना है कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
अपर पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) राजीव नारायण मिश्र के अनुसार, जांच कई स्तरों पर चल रही है। हिंसा के दौरान सामने आए तथ्यों, वीडियो फुटेज और डिजिटल साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है। साथ ही चिह्नित आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए स्वॉट (SWAT), सीआरटी (CRT) समेत छह विशेष टीमें लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। पुलिस का दावा है कि आने वाले दिनों में और भी आरोपियों की गिरफ्तारी हो सकती है।
83 स्थानों पर प्रदर्शन, 42 हजार से अधिक लोग शामिल
13 अप्रैल को नोएडा और ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर प्रदर्शन हुए थे। पुलिस के अनुसार, कुल 83 स्थानों पर हुए इन प्रदर्शनों में 42 हजार से अधिक लोग शामिल हुए। शुरुआत में यह प्रदर्शन वेतन वृद्धि की मांग को लेकर शांतिपूर्ण था, लेकिन देखते ही देखते यह हिंसक रूप में बदल गया। कई स्थानों पर तोड़फोड़, आगजनी और पुलिस पर पथराव जैसी घटनाएं सामने आईं।
बाहरी तत्वों की भूमिका, 2000 अज्ञात आरोपी
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि प्रदर्शन को हिंसक बनाने में बाहरी तत्वों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस मामले में अब तक 11 प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें 2000 से अधिक अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने इस मामले के मुख्य आरोपी आदित्य आनंद समेत अब तक 62 लोगों को गिरफ्तार किया है।
महिलाओं को दिया गया कैमरे छिपाने का प्रशिक्षण
जांच के दौरान एक चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि प्रदर्शन के दौरान सीसीटीवी कैमरों को निष्क्रिय करने के लिए महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण दिया गया था। कई वीडियो फुटेज में महिलाएं कैमरों पर कपड़ा डालती हुई दिखाई दी हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि हिंसा को योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया था।
इसके अलावा पुलिस को एक ऑडियो क्लिप और कुछ मैसेज भी मिले हैं, जिनमें गोली चलाने जैसी बातें कही गई हैं। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस आंदोलन की आड़ में नोएडा के औद्योगिक उत्पादन को पूरी तरह ठप करने की साजिश रची जा रही थी।
मास्टरमाइंड की रिमांड पर 24 अप्रैल को सुनवाई
मामले के मुख्य आरोपी आदित्य आनंद को लेकर पुलिस ने कोर्ट से सात दिन की कस्टडी रिमांड मांगी है। इस पर 24 अप्रैल को सुनवाई होनी है। वहीं अन्य आरोपियों—रूपेश राय की सहयोगी मनीषा, आकृति और सृष्टि गुप्ता—से भी पुलिस लगातार पूछताछ कर रही है।
पूछताछ के दौरान पुलिस को कई अहम सुराग मिले हैं। यह भी सामने आया है कि “मजदूर बिगुल” नामक संगठन अपने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से श्रमिकों को भड़काने का काम कर रहा था। पुलिस अब इस संगठन की भूमिका की भी गहराई से जांच कर रही है।
डिजिटल साक्ष्यों की जांच, गूगल से मांगी जानकारी
जांच एजेंसियां अब डिजिटल साक्ष्यों पर भी विशेष ध्यान दे रही हैं। आरोपियों से बरामद मोबाइल फोन और लैपटॉप से महत्वपूर्ण डेटा प्राप्त हुआ है। डिलीट किए गए डेटा को रिकवर करने के लिए गूगल से भी जानकारी मांगी गई है।
इसके साथ ही एक संदिग्ध सोशल मीडिया (एक्स) हैंडल की जांच भी की जा रही है, जिसके पाकिस्तान से संचालित होने की आशंका है। पुलिस का कहना है कि इसी हैंडल के जरिए हिंसा भड़काने का प्रयास किया गया था।
श्रमिकों के लिए अस्पताल में हेल्प डेस्क
घटना के बाद प्रशासन ने श्रमिकों की समस्याओं को देखते हुए सेक्टर-39 स्थित जिला अस्पताल में विशेष सहायता डेस्क की शुरुआत की है। अस्पताल के सीएमएस डॉ. अजय राणा के अनुसार, जिलाधिकारी के निर्देश पर दो हेल्प डेस्क बनाए गए हैं—एक रजिस्ट्रेशन काउंटर पर और दूसरा इमरजेंसी वार्ड में। इसका उद्देश्य घायल श्रमिकों को त्वरित और सुगम इलाज उपलब्ध कराना है।
नोएडा का यह घटनाक्रम केवल एक श्रमिक आंदोलन नहीं, बल्कि एक संभावित संगठित साजिश के रूप में सामने आ रहा है। एसआईटी की जांच से आने वाले दिनों में कई और चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। फिलहाल पुलिस की प्राथमिकता कानून व्यवस्था बनाए रखना और सभी दोषियों को गिरफ्तार करना है। प्रशासन भी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
