पहलगाम घटना की पहली बरसी, बैसरन घाटी के लोगों ने की अपील


प्रफुल्ल शर्मा (ग्रेटर नोएडा)


देश में पिछली साल हुए पहलगाम हमले को पुरा एक साल हो गया है। वहीं, 26 लोगों की शहादत के बाद पहलगाम में स्थित बैसरान घाटी के लोगों ने सरकार से अपील की है कि बैसरान घाटी को खोल दिया जाये। जब से घाटी प्रतिबंध लगा हैं तब से हमारा काम ठप हो गया है। साथ ही न तो पर्यटक आते हैं न ही हमारा काम चलता है। आज पहलगाम हमले की पहली बरसी है जिसमें 26 लोगों को आतंकवादियों ने बेरहमी से देश की धरती में घुसकर मार दिया था। वहीं देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट कर पहलगाम हमले को याद किया और कहा कि पिछले साल इसी दिन पहलगाम में हुए भयावह आतंकी हमले में जान गंवाने वाले निर्दोष लोगों को याद करते हुए। उन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। मेरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं, जो इस दुख से उबरने की कोशिश कर रहे हैं।

एक राष्ट्र के रूप में, हम शोक और दृढ़ संकल्प में एकजुट हैं। भारत आतंकवाद के किसी भी रूप के आगे कभी नहीं झुकेगा। आतंकवादियों के घिनौने मंसूबे कभी सफल नहीं होंगे। अब सवाल ये है की पहलगाम हमले में शिकार हुए परिवारों की फिलहाल स्थित क्या है तो कानपुर की ऐशान्या द्विवेजी अपने कमरे में लगे आईने की तरफ़ इशारा करके अपने पति शुभम को याद करती हैं। वो कहती हैं. “ मैंने एक बार उनसे पूछा था कि यहाँ आईना क्यों नहीं हैं। अगले दिन वो ये आईना ले आए.” शुभम द्विवेदी, उन 26 लोगों में शामिल थे, जिनकी चरमपंथियों ने 22 अप्रैल 2025 को हत्या कर दी थी। पर्यटकों पर की गई ये गोलीबारी कशमीर में दशकों के सबसे घातक नागरिक हमलों में से एक थी।


भारत ने पहलगाम हमले के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया था। भारत का आरोप था की हत्याएं पाकिस्तान बेस्ड एक संगठन ने करवाकर अंजाम दी है। हालांकि पाकिस्तान इस आरोप को नकराता रहा है। दो हफ्त़ बाद, भारत ने पाकिस्तान पर जवाबी कारवाई करते हुए कई जगहों पर आतंकवादी ठिकानो को ध्वस्त कर दिया था

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