तुगलकाबाद अग्निकांड में नए सवाल, कई मंजिलों के दरवाजों पर बाहर से कुंडियां मिलने का दावा

अंकित शर्मा, आईआईएमटी न्यूज। दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के तुगलकाबाद एक्सटेंशन स्थित एक पांच मंजिला रिहायशी इमारत में हुए भीषण अग्निकांड के बाद हादसे को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस दर्दनाक घटना में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य लोग घायल हुए। आग पर तो काबू पा लिया गया, लेकिन हादसे के बाद सामने आए तथ्यों ने सुरक्षा व्यवस्था और भवन प्रबंधन को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय निवासियों का दावा है कि आग लगने के दौरान इमारत की कई मंजिलों के मुख्य दरवाजों पर बाहर से कुंडियां लगी हुई थीं। यदि यह दावा सही साबित होता है तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आपात स्थिति में लोगों के बाहर निकलने के रास्ते क्यों बंद थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि धुएं और आग के बीच फंसे लोगों के लिए यह स्थिति जानलेवा साबित हुई।

घटना बृहस्पतिवार देर रात करीब 2:25 बजे गोविंदपुरी थाना क्षेत्र के तुगलकाबाद एक्सटेंशन में स्थित एक रिहायशी इमारत में हुई। शुरुआती जानकारी के अनुसार आग ग्राउंड फ्लोर पर खड़े दोपहिया वाहनों में लगी और देखते ही देखते पूरी इमारत धुएं से भर गई। आग से ज्यादा नुकसान घने धुएं ने पहुंचाया, जो कुछ ही मिनटों में ऊपरी मंजिलों तक फैल गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इमारत में फंसे लोगों ने जान बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया। कुछ लोगों ने साड़ियों को बांधकर खिड़कियों से नीचे उतरने की कोशिश की, जबकि कई लोग छत पर पहुंचकर मदद का इंतजार करते रहे। आसपास के लोगों ने भी बचाव कार्य में सक्रिय भूमिका निभाई, लेकिन घना धुआं और आग राहत कार्य में बड़ी बाधा बन गए।

स्थानीय निवासी रेनू भूटानी और उनके बेटे मानव भूटानी ने राहत कार्य में हिस्सा लिया। उनका दावा है कि जब वे इमारत के पीछे की ओर पहुंचे तो छत का गेट बंद मिला और उस पर ताला लगा हुआ था। आग की गर्मी से गेट क्षतिग्रस्त हो चुका था, जिसके बाद उसे तोड़कर रास्ता बनाया गया। उन्होंने यह भी दावा किया कि तीसरी मंजिल के मुख्य दरवाजे पर बाहर से लगी कुंडी खोली गई, जिसके बाद वहां फंसे लोगों तक पहुंचा जा सका।

रेनू भूटानी के अनुसार छत पर रखी पानी की टंकियों में छेद कर पानी सीढ़ियों की ओर बहाया गया, ताकि धुएं का असर कम किया जा सके। इसके बाद स्थानीय लोगों और राहतकर्मियों ने मिलकर फंसे लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया।

हादसे में पंकज (28), उनकी नानी सुशीला देवी (70) और बहन सोनी (20) की मौत हो गई। वहीं पंकज की मां गुड्डी देवी और बहन मोनी सहित अन्य लोग गंभीर रूप से प्रभावित हुए। दमकल और पुलिस टीमों ने संयुक्त अभियान चलाकर आठ लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।

आग लगने के कारण को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आए हैं। पुलिस की प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट को आग का कारण माना जा रहा है। हालांकि स्थानीय निवासियों का कहना है कि ग्राउंड फ्लोर पर एक ई-स्कूटर चार्जिंग पर लगा हुआ था और उसी में स्पार्किंग होने के बाद आग भड़की। इसके बाद आग अन्य वाहनों तक फैल गई और स्थिति बेकाबू हो गई।

दमकल विभाग के अधिकारियों के अनुसार इमारत संकरी गली में स्थित थी, जिससे राहत और बचाव कार्य में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद दमकल कर्मियों ने तेजी से कार्रवाई करते हुए आग पर काबू पाया और कई लोगों की जान बचाई।

फिलहाल पुलिस और दमकल विभाग आग लगने के वास्तविक कारणों की जांच कर रहे हैं। साथ ही यह भी जांच का विषय बन गया है कि क्या इमारत में अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था और क्या वास्तव में कुछ मंजिलों के दरवाजों पर बाहर से कुंडियां लगी हुई थीं। जांच पूरी होने के बाद ही हादसे की असली वजह और संभावित लापरवाही की तस्वीर साफ हो सकेगी।

About Post Author