अरुण विहार का स्वर्णिम इतिहास, जहां हर सड़क सुनाती है वीरता और बलिदान की अमर गाथा
अंकित शर्मा, आईआईएमटी न्यूज, नोएडा। आधुनिक नोएडा की पहचान सिर्फ ऊंची इमारतों और विकसित बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं है। शहर का अरुण विहार क्षेत्र देशभक्ति, शौर्य और बलिदान की ऐसी जीवंत मिसाल है, जहां की हर सड़क, चौक और स्मारक भारतीय सेना के वीर जवानों की गौरवगाथा सुनाते हैं। सेक्टर-28, 29 और 37 में फैले अरुण विहार की आबादी करीब 25 हजार है, लेकिन इसकी पहचान देश के वीर सपूतों की यादों से जुड़ी हुई है।
अरुण विहार रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्ल्यूए) के चेयरमैन कर्नल (सेवानिवृत्त) प्रशांत गुप्ता के अनुसार इस क्षेत्र का नाम 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के परमवीर चक्र विजेता सेकेंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल के सम्मान में रखा गया था। महज 21 वर्ष की आयु में उन्होंने युद्धभूमि में अदम्य साहस का परिचय देते हुए दुश्मन के टैंकों को ध्वस्त किया और देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया।
अरुण विहार की गलियों में आज भी वीर सैनिकों की स्मृतियां जीवित हैं। सेक्टर-37 स्थित गोल्फ कोर्स मेट्रो स्टेशन के पास बना शशि चौक कैप्टन शशिकांत शर्मा की याद में स्थापित किया गया है। उन्होंने 5 अक्टूबर 1998 को देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया था। उन्हें सेना मेडल और अन्य वीरता पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था।
इसी प्रकार सेक्टर-18 से बॉटनिकल गार्डन तक जाने वाला प्रमुख मार्ग कैप्टन विजयंत थापर मार्ग के नाम से जाना जाता है। 1999 के कारगिल युद्ध में 2 राजपूताना राइफल्स के युवा अधिकारी कैप्टन विजयंत थापर ने तोलोलिंग की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई थी। मात्र 22 वर्ष की आयु में उन्होंने मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे।
आरडब्ल्यूए की जनसंपर्क अधिकारी अनीता अरोड़ा ने बताया कि कारगिल और अन्य सैन्य अभियानों में शहीद हुए सैनिकों की स्मृतियों को संरक्षित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2003 में राजौरी में शहीद हुए मेजर उदय सिंह के नाम पर चमेली मार्ग का नामकरण करने का प्रस्ताव भी प्रशासन को भेजा गया है, जो अभी विचाराधीन है। मेजर उदय सिंह को मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया था।
अरुण विहार के लोगों ने बॉटनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन का नाम बदलकर ‘कारगिल मेट्रो स्टेशन’ करने की मांग भी उठाई है। आरडब्ल्यूए ने इस संबंध में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को पत्र लिखकर प्रस्ताव भेजा है। इसकी प्रतियां नोएडा प्राधिकरण और स्थानीय प्रशासन को भी सौंपी गई हैं।
क्षेत्र में स्थित आर्मी पब्लिक स्कूल में 1971 के भारत-पाक युद्ध में इस्तेमाल की गई एक युद्धक तोप आज भी स्मृति चिह्न के रूप में स्थापित है। यह तोप नई पीढ़ी को देश के वीर सैनिकों के साहस और बलिदान की याद दिलाती है।
वीर सैनिकों के परिजनों का कहना है कि ऐसे स्मारक और नामकरण युवाओं को राष्ट्रसेवा और देशभक्ति के लिए प्रेरित करते हैं। उनका मानना है कि आने वाली पीढ़ियां इन वीर सपूतों के जीवन से प्रेरणा लेकर देश के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगी।
आज अरुण विहार केवल एक आवासीय क्षेत्र नहीं, बल्कि देशभक्ति, सैन्य परंपरा और बलिदान की जीवंत विरासत बन चुका है, जहां हर राह शौर्य और पराक्रम की अमर गाथा गाती है।
