बंगाल से घुसपैठियों का पलायन: होल्डिंग सेंटर के डर से लौट रहे बांग्लादेशी नागरिक
डॉ रामशंकर, आईआईएमटी न्यूज। पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में इन दिनों एक अलग तरह की हलचल दिखाई दे रही है। उत्तर 24 परगना जिले के स्वरूपनगर स्थित हाकिमपुर चेकपोस्ट के आसपास पिछले कुछ दिनों से बड़ी संख्या में ऐसे परिवार देखे जा रहे हैं, जो वर्षों से बंगाल में रह रहे थे और अब अचानक सीमा की ओर लौटने को मजबूर हो गए हैं। इन परिवारों के चेहरों पर डर, असमंजस और भविष्य की चिंता साफ झलक रही है। महिलाओं के हाथों में कपड़ों से भरे छोटे बैग, बच्चों की डरी हुई निगाहें और रात के अंधेरे में सीमा की ओर बढ़ते समूह इलाके में चर्चा का विषय बने हुए हैं।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, राज्य में अवैध घुसपैठ और फर्जी दस्तावेजों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चर्चाओं ने इन परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। भाजपा सरकार बनने के बाद प्रस्तावित “होल्डिंग सेंटर” की खबरों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। बताया जा रहा है कि जिन लोगों की पहचान अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के रूप में होगी, उन्हें पहले होल्डिंग सेंटर में रखा जाएगा और बाद में सीमा पार भेजा जा सकता है। इसी आशंका के कारण कई परिवार खुद ही वापस लौटने लगे हैं।
कोलकाता, बारासात, दमदम, हावड़ा और आसपास के इलाकों में वर्षों से रह रहे इन लोगों ने स्थानीय जीवन का हिस्सा बना लिया था। इनमें रिक्शा चालक, निर्माण मजदूर, घरेलू सहायिका और छोटे कारखानों में काम करने वाले लोग शामिल हैं। कई लोगों ने आधार कार्ड, राशन कार्ड और वोटर आईडी जैसे दस्तावेज भी बनवा लिए थे। कुछ लोगों का कहना है कि वे पिछले दस वर्षों से अधिक समय से बंगाल में रह रहे थे और मजदूरी करके अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे।
28 वर्षीय नसीम मोल्ला, जो कोलकाता के एक चमड़ा कारखाने में काम करता था, ने बताया कि पहले उन्हें लगा था कि केवल दस्तावेजों की जांच होगी, लेकिन अब फैक्ट्री मालिकों ने भी उन्हें कुछ समय के लिए गायब रहने की सलाह दी है। उनका कहना है कि वे गरीब लोग हैं और जेल जाने से डरते हैं। वहीं 42 वर्षीय अब्दुल करीम ने बताया कि वह दस साल पहले मजदूरी के लिए बंगाल आया था। यहां उसने पहचान पत्र भी बनवा लिए और चुनाव में मतदान तक किया, लेकिन अब माहौल पूरी तरह बदल चुका है।
सीमा से लगे गांवों के लोगों का कहना है कि पिछले एक साल में यह दूसरा मौका है, जब बड़ी संख्या में लोग अचानक सीमा की ओर लौटते दिखाई दे रहे हैं। देर रात से सुबह तक छोटे-छोटे समूहों में लोगों का आना-जाना लगातार जारी है। स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां भी हालात पर नजर बनाए हुए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने बंगाल में अवैध घुसपैठ, पहचान और सुरक्षा को लेकर बहस को फिर तेज कर दिया है। राजनीतिक दल भी इस मुद्दे पर आमने-सामने हैं। जहां एक पक्ष इसे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला बता रहा है, वहीं दूसरा पक्ष मानवीय पहलुओं और गरीब मजदूर परिवारों की स्थिति को लेकर सवाल उठा रहा है। फिलहाल सीमावर्ती क्षेत्रों में भय और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
