टेलीग्राम पर प्रतिबंध बरकरार, हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की; सरकार के अधिकार को माना वैध
रामशंकर, आईआईएमटी न्यूज, नई दिल्ली। लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर दायर याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। अदालत ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था और परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सरकार के पास ऐसे कदम उठाने का संवैधानिक और कानूनी अधिकार है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा उठाया गया कदम परिस्थितियों को देखते हुए उचित था और इसमें न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने हाल ही में राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं, विशेष रूप से नीट री-एग्जाम से पहले टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया था। सरकार का तर्क था कि सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रश्नपत्रों के लीक होने, अफवाहों के प्रसार और परीक्षा से जुड़ी गोपनीय सूचनाओं के आदान-प्रदान की आशंका बनी हुई थी। इसी कारण सुरक्षा उपायों के तहत टेलीग्राम की सेवाओं पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया था।
प्रतिबंध के खिलाफ दायर याचिका में कहा गया था कि टेलीग्राम पर रोक लगाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नागरिकों के डिजिटल अधिकारों का उल्लंघन है। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि लाखों छात्र, व्यवसायी, शिक्षक और आम नागरिक इस प्लेटफॉर्म का उपयोग संचार और सूचना साझा करने के लिए करते हैं। ऐसे में पूरे प्लेटफॉर्म को बंद करना उचित नहीं है।
हालांकि, अदालत ने सरकार के पक्ष को स्वीकार करते हुए कहा कि जब राष्ट्रीय हित और सार्वजनिक व्यवस्था का प्रश्न हो, तब सरकार को आवश्यक कदम उठाने का अधिकार प्राप्त है। न्यायालय ने यह भी माना कि डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग केवल संचार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि कई बार इनका दुरुपयोग भी होता है, जिससे सुरक्षा संबंधी चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।
केंद्र सरकार की ओर से पेश पक्ष में कहा गया कि परीक्षा से जुड़े संवेदनशील मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित कर सकती है। सरकार ने अदालत को बताया कि पूर्व में कई मामलों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल गोपनीय सामग्री साझा करने और गलत सूचनाएं फैलाने के लिए किया गया था। ऐसे में एहतियातन प्रतिबंध लगाया गया, ताकि परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला डिजिटल प्लेटफॉर्म के नियमन और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जाएगा। हालांकि, कुछ डिजिटल अधिकार संगठनों ने इस निर्णय पर चिंता भी जताई है। उनका कहना है कि किसी भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर व्यापक प्रतिबंध लगाने के बजाय लक्षित कार्रवाई अधिक प्रभावी हो सकती है।
वहीं शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई विशेषज्ञों ने अदालत के फैसले का समर्थन किया है। उनका मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सरकार को समय-समय पर कठोर कदम उठाने पड़ सकते हैं। यदि किसी प्लेटफॉर्म के माध्यम से परीक्षा प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका हो तो सुरक्षा को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद फिलहाल टेलीग्राम पर लगाया गया प्रतिबंध जारी रहेगा। अदालत के आदेश से यह भी स्पष्ट हो गया है कि विशेष परिस्थितियों में सरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म पर नियंत्रण संबंधी कदम उठा सकती है, बशर्ते उनका उद्देश्य सार्वजनिक हित और सुरक्षा सुनिश्चित करना हो। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर व्यापक बहस जारी रहने की संभावना है, क्योंकि डिजिटल अधिकार और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों ही आधुनिक लोकतंत्र के महत्वपूर्ण विषय बन चुके हैं।
