पद्मिनी एकादशी पर मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, पूजा-अर्चना का दौर जारी
डॉ रामशंकर, आईआईएमटी। अधिक मास में आने वाली पद्मिनी एकादशी का पर्व बुधवार को देशभर में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। इस विशेष अवसर पर सुबह से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की आराधना के लिए भक्त बड़ी संख्या में मंदिर पहुंचे और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पद्मिनी एकादशी का व्रत अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है और इससे जीवन के कष्ट दूर होते हैं तथा सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।
दिल्ली, वाराणसी, अयोध्या, मथुरा, वृंदावन, हरिद्वार और उज्जैन जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर विशेष आयोजन किए गए। मंदिरों को फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया गया। कई स्थानों पर भजन-कीर्तन, विष्णु सहस्रनाम पाठ और धार्मिक प्रवचन आयोजित हुए, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। सुबह ब्रह्म मुहूर्त से ही भक्तों ने स्नान कर व्रत का संकल्प लिया और दिनभर भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप किया।
मथुरा और वृंदावन के मंदिरों में श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ रही। बांके बिहारी मंदिर, द्वारकाधीश मंदिर और इस्कॉन मंदिरों में दर्शन के लिए भक्त घंटों कतारों में खड़े रहे। हरिद्वार और वाराणसी के घाटों पर श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान कर पूजा की। कई लोगों ने गरीबों को भोजन और वस्त्र दान कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। धार्मिक मान्यता है कि पद्मिनी एकादशी के दिन दान-पुण्य करने से कई गुना फल मिलता है।
पंडितों और धर्माचार्यों के अनुसार पद्मिनी एकादशी अधिक मास में आने वाली विशेष एकादशी है, जिसका उल्लेख पुराणों में भी मिलता है। माना जाता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। महिलाएं परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की उन्नति के लिए व्रत रखती हैं, जबकि युवा अपने उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं।
त्योहार को लेकर बाजारों में भी रौनक देखने को मिली। पूजा सामग्री, फल, फूल और प्रसाद की दुकानों पर सुबह से भीड़ लगी रही। प्रशासन ने भीड़ को देखते हुए मंदिरों के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई और यातायात नियंत्रण के विशेष इंतजाम किए। कई मंदिरों में चिकित्सा शिविर और पेयजल की व्यवस्था भी की गई।
आध्यात्मिक वातावरण और भक्ति भाव से सराबोर इस पर्व ने लोगों में धार्मिक आस्था और सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया। श्रद्धालुओं ने दिनभर उपवास रखकर भगवान विष्णु का स्मरण किया और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना की। पद्मिनी एकादशी का यह पावन अवसर लोगों के लिए आस्था, संयम और सेवा का संदेश लेकर आया।
