गंगा दशहरा पर मां गंगा को 5100 साड़ियों की चुनरी अर्पित, घाटों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
रामशंकर, आईआईएमटी. गंगा दशहरा के पावन अवसर पर अयोध्या के घाट श्रद्धा, भक्ति और उत्साह से सराबोर दिखाई दिए। सुबह से ही हजारों श्रद्धालु पवित्र स्नान और पूजा-अर्चना के लिए घाटों पर पहुंचने लगे। इस विशेष मौके पर मां गंगा को 5100 साड़ियों से तैयार भव्य चुनरी अर्पित की गई, जिसने सभी श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित किया। धार्मिक मान्यता के अनुसार गंगा दशहरा के दिन मां गंगा की पूजा और स्नान करने से पापों का नाश होता है तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
कार्यक्रम के दौरान संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मां गंगा का 501 लीटर दूध से अभिषेक किया। पूरे घाट क्षेत्र में शंखनाद, घंटियों की ध्वनि और भजन-कीर्तन से भक्तिमय वातावरण बना रहा। श्रद्धालुओं ने दीप जलाकर मां गंगा की आरती उतारी और परिवार की खुशहाली की कामना की। महिलाओं और युवाओं ने भी बड़ी संख्या में धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लिया।
घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल और स्वयंसेवकों की तैनाती की गई थी। जगह-जगह मेडिकल कैंप, पेयजल और सहायता केंद्र बनाए गए ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो। नगर निगम की ओर से घाटों की विशेष सफाई कराई गई और स्वच्छता बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी रखी गई।
धार्मिक आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि 5100 साड़ियों से बनी चुनरी को तैयार करने में कई दिनों का समय लगा। चुनरी को विशेष रूप से सजाया गया था और इसे श्रद्धा के प्रतीक के रूप में मां गंगा को अर्पित किया गया। श्रद्धालुओं का कहना था कि इस तरह के आयोजन भारतीय संस्कृति और आस्था को मजबूत करते हैं तथा लोगों को धर्म और परंपराओं से जोड़े रखते हैं।
शाम होते-होते घाटों की रौनक और बढ़ गई। गंगा आरती के दौरान पूरा वातावरण दीपों की रोशनी और मंत्रों की गूंज से जगमगा उठा। श्रद्धालुओं ने मोबाइल कैमरों में इस भव्य आयोजन को कैद किया। दूर-दराज से आए लोगों ने कहा कि गंगा दशहरा का यह आयोजन उनके लिए अविस्मरणीय अनुभव रहा।
धार्मिक विद्वानों के अनुसार गंगा दशहरा का पर्व ज्येष्ठ शुक्ल दशमी को मनाया जाता है। मान्यता है कि इसी दिन मां गंगा स्वर्ग से धरती पर अवतरित हुई थीं। इसलिए इस दिन गंगा स्नान, दान और पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। अयोध्या में आयोजित यह भव्य कार्यक्रम श्रद्धा और आस्था का अनूठा उदाहरण बनकर सामने आया।
