राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर संतों का फूटा गुस्सा, बोले- भगवान के धन में हाथ डालने वाले कीड़े बनेंगे
रामशंकर, आईआईएमटी न्यूज। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले ने धार्मिक जगत में तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर दी है। देशभर के संत-महात्माओं ने इस घटना को न केवल आस्था पर आघात बताया है, बल्कि इसे रामनगरी की मर्यादा के विपरीत भी करार दिया है। संतों का कहना है कि भगवान के चरणों में अर्पित धन श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक होता है और उसमें किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या चोरी अक्षम्य अपराध है।
राम मंदिर में करोड़ों रुपये के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं और चोरी के आरोपों के सामने आने के बाद संत समाज में गहरी नाराजगी देखी जा रही है। कई संतों ने खुलकर कहा कि जो व्यक्ति भगवान के धन में हाथ डालता है, उसे कभी शांति नहीं मिल सकती। उन्होंने धार्मिक मान्यताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे लोगों को अपने कर्मों का दंड अवश्य भुगतना पड़ता है।
संतों का कहना है कि अयोध्या केवल एक धार्मिक नगरी नहीं, बल्कि मर्यादा और आदर्शों की भूमि है। यही वह स्थान है जहां भगवान राम ने लोकमर्यादा और धर्म की रक्षा के लिए अनेक कठिन निर्णय लिए थे। ऐसे में यदि राम मंदिर जैसे पवित्र स्थान पर चढ़ावे की सुरक्षा में लापरवाही हुई है तो यह अत्यंत चिंताजनक विषय है।
धार्मिक नेताओं ने कहा कि मंदिर प्रशासन और ट्रस्ट की जिम्मेदारी केवल मंदिर के निर्माण और संचालन तक सीमित नहीं है, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था और उनके द्वारा दिए गए दान की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उनका कर्तव्य है। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या चोरी सिद्ध होती है तो दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
संत समाज ने यह भी सवाल उठाया कि इतने बड़े स्तर पर कथित गड़बड़ी की चर्चा होने के बावजूद अभी तक किसी जिम्मेदार अधिकारी या पदाधिकारी ने सार्वजनिक रूप से नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की है। उनका कहना है कि किसी भी संस्था की विश्वसनीयता उसके पारदर्शी और जवाबदेह व्यवहार से बनती है। इसलिए यदि सुरक्षा व्यवस्था में चूक हुई है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों को सामने आकर स्पष्टीकरण देना चाहिए।
अयोध्या के कई साधु-संतों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए। जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए ताकि श्रद्धालुओं के मन में किसी प्रकार का भ्रम या अविश्वास न रहे। उनका कहना है कि राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है और इसकी प्रतिष्ठा बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
संतों ने श्रद्धालुओं से भी अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और जांच पूरी होने तक संयम बनाए रखें। साथ ही उन्होंने प्रशासन से मांग की कि मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था और वित्तीय निगरानी प्रणाली को और अधिक मजबूत किया जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
धार्मिक और सामाजिक संगठनों का मानना है कि इस मामले में शीघ्र कार्रवाई और पारदर्शिता ही लोगों का विश्वास बनाए रखने का सबसे प्रभावी माध्यम होगी। राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की भावनाओं और विश्वास का प्रतीक है। ऐसे में उससे जुड़ी किसी भी अनियमितता पर गंभीरता से कार्रवाई होना आवश्यक है।
फिलहाल मामले को लेकर संत समाज की प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं और सभी की नजरें जांच एजेंसियों तथा संबंधित प्रशासनिक संस्थाओं की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
