NEET पेपर लीक पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: बोला- UPSC से सीखे NTA, जवाबदेही तय किए बिना नहीं रुकेंगी गड़बड़ियां
रामशंकर, आईआईएमटी न्यूज। नीट-यूजी 2026 पेपर लीक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक ऐसी घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं। अदालत ने टिप्पणी की कि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) भी बड़े पैमाने पर परीक्षाएं आयोजित करता है, लेकिन वहां कभी पेपर लीक जैसी स्थिति सामने नहीं आई। ऐसे में NTA को UPSC से सीख लेने की आवश्यकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ ने शिक्षा मंत्रालय और NTA से परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था तथा जांच प्रक्रिया का विस्तृत ब्योरा मांगा। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं मामले की जांच की निगरानी कर रहे हैं ताकि किसी भी स्तर पर कोई चूक न हो। उन्होंने कहा कि सरकार युवाओं के भविष्य को लेकर गंभीर है और री-एग्जाम के लिए नई सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने NTA को भंग करने संबंधी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए 2024 के पेपर लीक मामले के बाद गठित हाई-पावर मॉनिटरिंग कमेटी के अध्यक्ष एवं पूर्व इसरो प्रमुख डॉ. के. राधाकृष्णन से भी सवाल किए। अदालत ने पूछा कि जब समिति की सिफारिशें लागू कर दी गई थीं, तो फिर इस वर्ष पेपर लीक जैसी घटना कैसे हुई। इस पर राधाकृष्णन ने बताया कि समिति द्वारा दिए गए अधिकांश सुझावों को लागू किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि NEET-PG 2025 सफलतापूर्वक आयोजित हुआ था और इस बार सामने आई कमजोरियों को 21 जून को होने वाली पुनर्परीक्षा से पहले दूर कर लिया जाएगा।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि NTA अभी एक स्थायी और मजबूत संस्था की तरह कार्य नहीं कर रही है। संस्थाओं को एड-हॉक तरीके से नहीं चलाया जा सकता। कोर्ट ने सुझाव दिया कि NTA को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) और अन्य प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के विशेषज्ञों की सहायता लेनी चाहिए ताकि परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जा सके। अदालत ने यह भी कहा कि छात्रों की मेहनत और भावनाओं को देखते हुए उन्हें ऐसे मानसिक आघात से बचाना बेहद आवश्यक है।
कोर्ट रूम में हुई बहस के दौरान जस्टिस नरसिम्हा ने पूछा कि क्या समस्या सिफारिशों में थी या उनके क्रियान्वयन में। इस पर राधाकृष्णन ने बताया कि समिति ने 35 दीर्घकालिक और 60 अल्पकालिक सुझाव दिए थे, जिनमें से अधिकांश पर अमल हो चुका है। उन्होंने स्वीकार किया कि प्रश्नपत्र से छेड़छाड़ बड़ी चुनौती रही, लेकिन आगामी परीक्षा में सुरक्षा के सभी उपाय किए जाएंगे। अदालत ने दोहराया कि वास्तविक जिम्मेदार लोगों की पहचान और कार्रवाई के बिना सुधार संभव नहीं है।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले 25 मई को हुई सुनवाई में भी सुप्रीम कोर्ट ने NTA को कड़ी फटकार लगाई थी। अदालत ने कहा था कि एजेंसी ने पिछले वर्ष हुए पेपर लीक प्रकरण से कोई सबक नहीं लिया। कोर्ट ने NTA से हलफनामा दाखिल कर यह बताने को कहा था कि मॉनिटरिंग कमेटी की सिफारिशों पर क्या कदम उठाए गए हैं। साथ ही केंद्र सरकार और CBI से भी जवाब मांगा गया था।
गौरतलब है कि NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई को देश के 551 शहरों और विदेश के 14 केंद्रों पर आयोजित की गई थी, जिसमें लगभग 23 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे। 7 मई को पेपर लीक की सूचना मिलने के बाद जांच शुरू हुई और 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई। अब पुनर्परीक्षा 21 जून को आयोजित होगी। मामले की जांच CBI कर रही है और अब तक 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों ने परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और पारदर्शिता को लेकर चल रही बहस को और तेज कर दिया है।
