अंडर ट्रायल कैदियों की हो ऑनलाईन सुनवाई, मोदी ने एक सम्मेलन में की अपील

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अमित सिंह। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में मुख्यमंत्रियों और HC के चीफ जस्टिस के संयुक्त सम्मेलन को संबोधित किया । सम्मेलन को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि आज सरकारी सेवाएं और सुविधाएं ऑनलाइन हो गईं हैं। आज हर एक वर्ग का युवा टेक्नोलॉजी का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करता है , टेक्नोलॉजी सबो के जीवन का एक हिस्सा बन गया है।

बीते दिन दिल्ली के विज्ञान भवन में देशभर के हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों और मुख्यमंत्रियों का सम्मेलन हुआ। उस सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एनवी रमना भी शामिल हुए। सम्मेलन के द्वरान मोदी ने जजों से न्यायिक प्रक्रिया को डिजिटलीकरण से जोड़ने का सुझाव दिया। मोदी ने जेलों में बंद अंडर ट्रायल कैदियों के लिए की खास अपील।

पाएम मोदी ने आज देश भर में 3.50 लाख अंडर ट्रायल कैदियों की बात सम्मेलन में मौजुद जजों और मुख्यमेत्रीयों से की। अपील में मोदी ने कहा कि हमे मानवीय संवेदनाओ और कानून के आधार पर इन कैदियों की रिहाई को प्राथमिकता देनी चाहिए, और संभव हो तो उन्हें बेल पर रिहा कराने की कोशिश करनी चाहिए। क्योंकि इन अंडर ट्रायल कैदियों में से ज्यादा तर कैदी गरीब या सामानय परिवार में से आते हैं। मोदी ने डिस्ट्रिक जजों से इस मामले पर खास ध्यान देने के लिए कहा है।

मीडिएशन है अंडर ट्रायल कैदियों का उपाय।

मोदी ने सम्मेलन के द्वरान मीडिएशन की भी चर्चा की। कहा हम पुरे विश्व को एक नई प्रेर्ना दे सकते हैं और ग्लोबल लिडर बन सकते हैं। भारतीय परिवेश में हजारों साल पहले से ही मीडिएशन यानी मध्यस्थता की परंपरा चली आ रही है, हम आपसी सहमति से सभी वाद-विवादों को सुलझाते आए हैं। हमें इसे फिर से व्यवहार में लाना होगा।

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