एयर इंडिया की अर्श से फर्श तक की दिलचस्प कहानी


एयर इंडिया की शुरूआत सर्वप्रथम जेआरडी टाटा ने की थी। इसकी स्थापना 15 अक्टूबर 1932 को हुई थी। सिंगल इंजन वाला हवाई जहाज ‘हैवीलैंड पस मोथ’ की पहली उड़ान कराची से मुबंई तक भरी गई थी। इस विमान को उड़ाने के बाद अहमदाबाद में रोका गया था, जहां ईंधन को बैलगाड़ी पर लादकर लाया गया था। अहमदाबाद से उड़ान भरने के बाद इस विमान को दोपहर 1 बजकर 50 मिनट पर बंबई के जुहू के हवाई अड्डे पर लैंड कराया गया था। भारत में यहीं से सबसे पहले पैंसेजर फ्लाइट की शुरूआत हुई थी। हालांकि उसके बाद ही भारत में टाटा एयरलाइंस के नाम से पहली कंपनी बनी थी।
टाटा एयरलाइंस ने साल 1933 में 1.60 लाख मील की उड़ान भरी थी। उसके बाद द्वितीय विश्व(1939) युद्ध के दौरान विमानों के पंख रूक गए थे। और कंपनी का खराब दौर शुरू हो गया था। दूसरा विश्व युद्ध खत्म होने के बाद 29 जुलाई 1946 को टाटा एयरलाइंस पब्लिक कंपनी बन गई थी। इसके बाद इस कंपनी का नाम बदलकर एयर इंडिया कर दिया गया था। दरअसल, देश आजाद होने के बाद भारत सरकार ने एयर इंडिया से 49 प्रतिशत हिस्सा खरीद ली। इसके बाद भारत सरकार ने 1953 में देश की सभी एयर लाइंस कंपनियों को राष्ट्रीयकरण के तहत शामिल कर दिया था।

इसी साल सरकार ने एयर कॉर्पोरेशन एक्ट भी लागू किया था। यह कंपनी उसके बाद पूरी तरह से सरकारी कंपनी में तब्दील हो गई थी। 1960 में कंपनी ने बोइंग 707-420 एयरक्राफ्ट को ग्रुप में शामिल किया। एयर इंडिया कुछ सालों बाद ही दुनिया की पहली ऑल-जेट एअरलाइन बन गई।
शुरुआत में एयर इंडिया के लोगो में धनु का निशान था। जो कोणार्क के एक गोले में धनुष चलाता दिखाई पड़ता था। इसकी थीम शुरू से ही लाल और सफेद रंग की रही है। लेकिन 2007 में इसका लोगो बदलकर एक लाल रंग के उड़ते हुए हंस जैसा कर दिया गया।  

इस कंपनी को कॉमर्शियल निदेशक बॉबी कूका और आर्टिस्ट जे वॉल्टर थॉम्पसन ने मिलकर बनाया था।
गौरतलब है कि 2007 में एयर इंडिया और इंडियन एअरलाइंस का बुरे दिन शुरू हो गये थे। उसके बाद सरकार ने फ्यूल की बढ़ती कीमत को प्राइवेट एयरलाइन कंपनियों की प्रतिस्पर्धा का कारण बताया था। उसके बाद कंपनी घाटे में आ गई। कंपनी पर 31 मार्च 2019 तक कर्ज की रकम 60 हजार करोड़ रुपए हो गया था। वाजपेयी सरकार में एयर इंडिया के विनिवेश की पहली कोशिश की गई थी। इसके बाद 2018 में दूसरी कोशिश की गई। लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। अंत में सरकार ने 2020 में एयर इंडिया की 100% हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया।