युवाओं की सोच से बनेगा नया भारत: ‘प्रेरणा विमर्श–2026’ में शिक्षा, मीडिया और रोजगार पर मंथन
मीनाक्षी जागलान आईआईएमटी न्यूज,ग्रेटर नोएडा। प्रेरणा शोध संस्थान न्यास, नोएडा एवं गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘प्रेरणा विमर्श–2026’ के अंतर्गत रविवार को ‘उत्कर्ष–नारी सम्मान, युवा स्वाभिमान’ विषय के तहत ‘युवा आयाम’ में ‘युवा सोच, नया भारत’ विषय पर विचार सत्र आयोजित किया गया। गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित सत्र में शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास, उद्यमिता, मीडिया और डिजिटल तकनीक के क्षेत्र में युवाओं की भूमिका पर विशेषज्ञों ने विचार रखे।
विचार सत्र में आईआईएमटी कॉलेज समूह के प्रबंध निदेशक डॉ. मयंक अग्रवाल, एनडीटीवी की एंकर सुश्री रंजना राठौड़ तथा टाइम्स नाउ–नवभारत की एंकर सुश्री साक्षी मिश्रा ने युवाओं से संवाद किया। सत्र का संचालन प्रो. (डॉ.) अनिल कुमार निगम, संयोजक–युवा आयाम, ने किया।
डॉ. मयंक अग्रवाल ने कहा कि युवाओं को केवल डिग्री तक सीमित न रहकर अपने कौशल, व्यवहारिक ज्ञान और उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को तैयार करना होगा। उन्होंने संस्थानों और उद्योग के बीच बेहतर समन्वय तथा विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव और रोजगारोन्मुख अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया। सुश्री रंजना राठौड़ ने मीडिया और सोशल मीडिया के बदलते स्वरूप पर चर्चा करते हुए कहा कि आज सूचना की गति बहुत तेज है, लेकिन सूचना की विश्वसनीयता उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने युवाओं से सोशल मीडिया पर किसी भी सामग्री को साझा करने से पहले उसके स्रोत और तथ्य की जांच करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल होना और विश्वसनीय होना दो अलग-अलग बातें हैं। सुश्री साक्षी मिश्रा ने युवाओं के सामने मौजूद डिजिटल अवसरों और चुनौतियों पर विचार रखते हुए कहा कि नई पीढ़ी को अपनी बात प्रभावी ढंग से रखने के साथ-साथ अपनी भारतीय सांस्कृतिक जड़ों से भी जुड़े रहना चाहिए। उन्होंने युवाओं को समय के सदुपयोग, आत्मविश्वास और निरंतर सीखने की आवश्यकता पर बल दिया। विशेषज्ञों ने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं के लिए पारंपरिक शिक्षा के साथ कौशल विकास, तकनीकी दक्षता, संचार क्षमता और व्यावहारिक अनुभव भी आवश्यक हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल मीडिया के विस्तार ने युवाओं के सामने नए अवसर पैदा किए हैं, लेकिन इसके साथ सूचना की विश्वसनीयता और जिम्मेदार डिजिटल व्यवहार की चुनौती भी बढ़ी है। कार्यक्रम में शिक्षा के साथ रोजगारपरक कौशल, विद्यार्थियों को उद्योग से जोड़ने, व्यावहारिक प्रशिक्षण, डिजिटल मीडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा युवाओं में उद्यमिता की भावना विकसित करने जैसी पहलों पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने युवाओं को उपलब्ध अवसरों की जानकारी प्राप्त करने और उनका व्यावहारिक लाभ उठाने की आवश्यकता बताई।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी और प्रश्नोत्तर सत्र रहा। विद्यार्थियों ने शिक्षा, करियर, रोजगार, मीडिया, सोशल मीडिया, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल तकनीक और भारतीय संस्कृति से जुड़े विभिन्न प्रश्न वक्ताओं के समक्ष रखे। युवाओं ने सोशल मीडिया पर वायरल होने और विश्वसनीयता, एआई के बढ़ते प्रभाव, रोजगार के बदलते अवसरों तथा आधुनिकता के साथ भारतीय मूल्यों को बनाए रखने जैसे विषयों पर भी सवाल किए। वक्ताओं ने विद्यार्थियों के प्रश्नों का उत्तर देते हुए अपने अनुभव साझा किए और उन्हें व्यावहारिक सुझाव दिए। प्रो. (डॉ.) अनिल कुमार निगम ने सत्र का संचालन करते हुए विद्यार्थियों को बेझिझक प्रश्न पूछने और अपने विचार व्यक्त करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि युवाओं के प्रश्न उनकी जिज्ञासा, चिंतन और भविष्य को लेकर उनकी गंभीरता को दर्शाते हैं। उन्होंने युवाओं को तथ्यपरक सोच विकसित करने, निरंतर सीखने और तकनीक का जिम्मेदारी के साथ उपयोग करने का संदेश दिया।
आयोजकों ने कहा कि ‘युवा सोच, नया भारत’ का उद्देश्य युवाओं को केवल भविष्य की शक्ति के रूप में देखने के बजाय वर्तमान में राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में उनकी सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देना है। शिक्षा, कौशल, नवाचार और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ी युवा शक्ति भारत के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड क्षेत्र प्रचार प्रमुख एवं आयोजन के मार्गदर्शक कृपा शंकर की विशेष उपस्थिति रही। राष्ट्रीय संगोष्ठी 20 सितंबर 2026 को आयोजित की गई। प्रो. (डॉ.) अनिल कुमार निगम, संयोजक–युवा आयाम, ने सत्र का संयोजन एवं संचालन किया।
