स्वास्थ्य विभाग : इम्यूनिटी पॉवर की कमी से जूझने वालों की संख्या बढ़ी

इम्यूनिटी

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मोहित कुमार: स्वास्थ्य एक्सपर्ट ने इम्यूनिटी पॉवर की कमी से जूझ रहे लोगों की पड़ताल की। जांच के बाद डाटा काफी चौकानें वाला सामने आया। जांच के मुताबिक, देश में प्रतिरोधक क्षमता की कमी से जूझ रहे वयस्कों की संख्या 76.67 फीसदी औऱ युवाओं की संख्या 43.27 फीसदी औऱ बाल्यकाल में इम्यूनिटी से पीड़ित 23.01 फीसदी का आकड़ा सामने आया है। बता दें कि, यह आकंड़ा अनुमानित तौर पर दिया गया है, इसकी अधिकारिक पुष्टि नहीं की जा सकती है। फिलहाल आकंड़ा देश की कुल आबादी की स्वास्थ्य जांच के आधार पर दिया गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ ने इम्यूनिटी की कमी के मुख्यता कुच कारण बताए, जिनमें केमिकल युक्त भोजन एंव दवाएं संलिप्त है। माना जा रहा है कि आयुर्वेदिक उपचार व योग व्यायाम की कमी के कारण आजकल इमयूनिटी की कमजोरी से जूझना पड़ रहा है। मानव जीवन में खान-पान औऱ आयुर्वेदिक का उपयोग प्रारंभ हो जाए तो आज भी शरीर निरोगी बन सकता है। मानव जीवन की दिनचर्या में परिवर्तन होने की जरूरत है। अधिकांश लोग बीमारी से घिरे हुए होते है, उनके दिनचर्या में काफी आलस भरा होता है। बाहर से आने वाला भोजन एवं केमिकल युक्त दवाएं शरीर को नष्ट कर रही है। इनका बहिष्कार कर हम वनस्पति को अपनाने में सार्थक नहीं होंगे जबतक ऐसा ही मामला बना रहेगा। आपको बता दें ज्यादातर लोगों में जिन पोषक तत्वों की कमी होती है, बहु कुछ इस प्रकार हैं, विटामिन डी, विटामिन बी12, फोलेट और प्रोटीन आदि। जब शरीर में इन पोषक तत्वों की कमी हो जाती है तो इससे शरीर छोटे – छोटे सूक्ष्मजीवों से लड़ने की भी क्षमता नहीं जुटा पाता और बीमार पड़ने लगता है। इसके अलावा रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूती प्रदान करने के लिए कुछ अन्य बातों का भी ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है जैसे समय पर सोना, हाइड्रेट रहना, स्वस्थ आहार लेना और एक्सरसाइज करना आदि। साथ ही इम्यूनिटी को मजबूती प्रदान करने के लिए कुछ जड़ी बूटियों का भी उपयोग किया जा सकता है।
होम्योपैथिक विशेषज्ञ ने इम्यूनिटी पॉवर की चार बूस्टर औषधि बताई जो शरीर को निरोग के साथ मजबूत प्रतिरोधक क्षमता उभारने का काम करेंगी। गुडूची या गिलोय आर्युवेदिक का रामवाण माना जाता है। प्रतिरोधक को मजबीत बनाने में सबसे फास्ट काम करती है। इसके उपयोग से गंभीर से गंभीर बीमारी को नष्ट करती है। इसके अलावा याददाश्त बेहतर करने और उम्र लंबी करने में भी गिलोय को उपयोगी माना जाता है। साथ ही सदियों से इसका उपयोग ब्रोंकाइटिस, अस्थमा, पुरानी खांसी और अन्य सांस से जुड़ी हुई बीमारियों को ठीक करने के लिए किया जाता है। अश्वगंधा बीमारी को मिटाने में प्रबल जड़ी है, इसमें गणवत्ताओं का खजाना छिपा है। प्राचीन काल से आधुनिक काल खंड में अश्वगंधा का उपयोग होता आ रहा है। अश्वगंधा का उपयोग हजारों वर्षों से दर्द और सूजन को कम करने में के लिए किया जाता है। यह जड़ी बूटी एक एडाप्टोजेन है जो स्ट्रेस को मैनेज करने और अनिद्रा को दूर करने में मदद करती है।
तुलसी को हिंदु धर्मार्थ में माता का दर्जा दिया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार तुलसी के बगैर भगवान प्रसाद स्वीकार नहीं करते है। तुलसी में बीमारी को समाप्त करने की बेहतर खूबी छिपी होती है। प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत कर शरीर को निरोग एंव फुर्तीला बनाने में कारगर साबित होती है। इसके अलावा तुलसी युक्त चाय भरपूर स्वाद प्रदान करती है। इसके जरिए रेस्पिरेटरी सिस्टम से जुड़ी कई समस्याओं से भी निजात मिल सकती है। साथ ही दबी हुई खांसी, चिंता, थकान, तनाव से भी राहत दिलाती है। यही नहीं छाती में आए भारीपन और जमाव से भी छुटकारा दिलाने का काम कर सकती है। तुलसी के अंदर एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने का भी काम करती है। आंवला शरीर के रोगों में काफी कारगर है, इसके उपयोग से लिवर, हृदय, मस्तिष्क और फेफड़ों के साथ – साथ कई दूसरे अंगों के कामकाज को भी सुधारा जा सकता है।

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