गोमती चक्र लाएगा आपके जीवन में खुशहाली, जल में पाये जाने के कारण यह चंद्र गुणों से पूर्ण होता है।

गोमती चक्र

गोमती चक्र

हर मनुष्य के जीवन में किसी न किसी तरह की परेशानी होती है। चाहे पैसे की , परिवार, प्यार या विवाह की समस्या मनुष्य को परेशान करती है।इसके लिए कई उपाय किये जाते हैं। इसमे एक है गोमती चक्र।गोमती चक्र एक दुर्लभ प्राकृतिक और आध्यात्मिक शैल पत्थर है, जो कि गोमती नदी में पाया जाता है। इस पवित्र पत्थर को भगवान श्रीकृष्ण के सुदर्शन चक्र का सूक्ष्म स्वरूप माना जाता है। यह पत्थर जिसके पास रहता है, उसकी सुरक्षा कवच के रूप में कार्य करता है।ज्योतिष के अनुसार गोमती चक्र को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है। इसकी सहायता से जीवन की किसी भी समस्या से मुक्ति पायी जा सकती है।

गोमती चक्र समुद्र में पाया जाता है। दक्षिण भारत में इसे गोमथी चक्र कहते है। पौराणिक काल में गोमती चक्र यज्ञवेदी के चारों ओर लगाया जाता था। गोमती चक्र को राहु का अंक मानते हैं और इससे धारण करने से राहु वश में रहता है। जल में पाये जाने के कारण यह चंद्र गुणों से परिपूर्ण होता है तथा उसके अन्दर सात लिखा होने के कारण राहु संबंधी समस्या से भी छुटकारा मिलता है। गोमती चक्र को पशुओं के गले में लाल कपड़े में बांध कर पहना देते हैं और बहुत से किसान अपने खेत के चारों कोनो में इसे दबाकर रखते हैं। यह आपको कही भी सरलता से बहुत ही कम कीमत में मिल जाता है। यह पूजन सामग्री बेचने वाली दुकानों में भी मिल सकता है।


गोमती चक्र की पहचान गोमती चक्र की पहचान है की यह एक तरफ से पत्थर की तरह दिखाई पड़ता है और दूसरी तरफ से समतल होता है। कहा जाता है की यदि इसके उपाय सही तरह से किए जाएं तो व्यक्ति की हर समस्या का समाधान हो जाता है। गोमती चक्र को लेकर पंडित रमाकांत मिश्रा जी बताते हैं की गोमती चक्र को सुदर्शन चक्र भी कहा जाता है।गोमती चक्र अभिमंत्रित करने के लिए 11 अथवा 21की संख्या में गोमती चक्र लेकर अपने पूजा स्थल पर स्थापित करें। विधिवत पूजा करें तथा निम्नलिखित मंत्र का 21 माला जप करें- ओम् श्रीं नमः। इस जाप के बाद गोमती चक्र अभिमंत्रित हो जाता है। पूजा के बाद इसे धन रखने वाले स्थान पर रख दें या इसकी माला को अपने गले या रिंग को उंगली में धारण कर सकते है।तथा नित्य धूप-दीप दिखाएं। स्वास्थ्य संबंधी समस्या आने पर एक गिलास गंगाजल में गोमती चक्र डाल दें तथा ओम् श्रीं नमः मंत्र का जाप 21 बार करते हुए रोगी को पिला दें। अभिमंत्रण का प्रभाव तीन वर्ष तक रहता है, 3 वर्ष बाद पुनः अभिमंत्रित करें।