पूर्व पीएम चौधरी चरणसिंह के जीवन पर आधारित किसान दिवस

चौधरी चरणसिंह

चौधरी चरणसिंह

लेखक के विचार स्वयं अध्ययन पर आधारित है- मोहित कुमार

23 नवंबर को भारत के गौरवशाली प्रधानमंत्री चौधरी चरणसिंह के जन्म दिवस के उपलक्ष्य पर तय हुआ है। देश के किसानों की स्थिति को सुधारने के लिए चरण सिंह ने काफी काम किए थे और यही कारण है कि उनके जन्मदिवस को राष्ट्री्य कृषक दिवस के लिए चुना गया। आझ उनके जन्म दिवस के अवसर को भला किसान नेता औऱ देश के बड़े-बड़े सियासी दल कैसे भूल सकते है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत सभी केंद्रीय मंत्री औऱ अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने पूर्व पीएम चौधरी चरणसिंह को श्रृद्धा सुमन अर्पित कर उन्हें स्मरण किया। चौधरी साहब आजीवन किसानों की समस्याओं को आवाज़ देते रहे और उनके कल्याण के लिए काम करते रहे। देश उनके योगदान को हमेशा याद रखेगा। चौधरी चरण सिंह चाहते थे कि देश के किसानों की आमदनी बढ़े, उनकी फसलों का लाभकारी मूल्य मिले और किसानों का मान सम्मान सुरक्षित रहे। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह औऱ रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट के जरिए कहा कि चौधरी साहब के मार्गदर्शन को मोदी ने अपनाया औऱ किसानों के हित में नई दिशा खोजने का विकल्प ढूढ़ में अपना उत्तरदायित्व निभाया है। किसानों का भूलकर कभी अहित नहीं होने दिया।

  उन्होंने कहा कि, आज किसान दिवस के अवसर मैं देश के सभी अन्नदाताओं का अभिनंदन करता हूं। उन्होंने देश को खाद्य सुरक्षा का कवच प्रदान किया है। पीएम मोदी ने किसान हित में तीन कृषि कानून बनाने, जो कुछ किसान समझ नहीं पाए। आंदोलन को समाप्त कर खेत में वापसी के लिए पीएम मोदी ने कानून वपस लिए उसके साथ 6 बड़ी मांगो को स्वीकार किया।  भारत को कृषि प्रधान देश माना जाता है, इसका श्रेय पूर्व पीएम चौधरी चरणसिंह को जाता है।  देश के किसानो को अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, कृषि उपज को लेकर उन्होंने कई बड़े लाभ प्रदान किए।   चरण सिंह 28 जुलाई 1979 से लेकर 14 जनवरी 1980 तक देश के प्रधानमंत्री रहे थे। 23 दिसंबर 1902 को उनका जन्म पश्चिमी यूपी के हापुड़ में हुआ था। उनके पिता का नाम चौधरी मीर सिंह थी। वे छेटे ही थे जब उनका परिवार जानी इलाके में जाकर बस गया था। उन्होंने आगरा यूनिवर्सिटी से पढाई की और फिर गाजियाबाद में कुछ वक्त के लिए वकालत भी की।    

पूर्व पीएम चौधरी चरणसिंह का आश्चर्य जनक किस्सा

साल 1979 में भारत की सत्ता मेरठ के चौधरी चरणसिंह के हाथ में आई, उस दौरान एक ऐशा कारिश्मा उन्होंने कर दिखाया जो आज भी प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। इतिहास में कभी ऐसा करिश्मा न हुआ है और न होने की संभावना है। एक बार इटावा के ऊसराहार थाने में एक वृद्ध रपट लिखवाने गया, रपट बैल चोरी होने की थी। उस दरमयान बाहर खड़े पुलिस कर्मी ने उन्हें इंतजार करने को कहा। वो बूढ़ा व्यक्ति इंतजार करने लगा। उसी समय अंदर से आवाज आई की आपको छोटो दरोगा बुला रहे है। दरोगा के सामने उन्होंने अपनी समस्या रखी। उसने झुझलाकर उन्हें वापस कर दिया। काफी मिन्नतों के बाद भी दरोगा ने एक न सुनी। निराश होकर किसान थाने से निकलने लगा कि उसी दरमयान एक पुलिस वाला आया उसने कहा कि बाबा कुछ खर्चा दे दो तो काम हो जाएगा। बूढ़े ने कहा कि में गरीब आदमी हूं, वहीं बैलों के सहारे मेरा जीवन चल रहा था। जब किसी ने न सुनी तो बूढ़े ने पूछा कि कितना खर्चा लगेगा। पुलिस कर्मी ने कहा कि 30 रुपए दे दो, समझो आपका काम हो गया। वृद्ध राजी हो गया। दरोगा ने कहा कि इस पेपर पर हस्ताक्षर करोगे या अंगूठा लगाओगे। बाबा ने कहा कि हस्ताक्षर करूंगा। पेपर सामने आया तो बूढ़े ने पैड औऱ पेन दोनों मांगे। पुलिस वाले ने कहा कि बाबा हस्ताक्षर में पैड का क्या काम। उस वृद्ध ने हस्ताक्षर करते हुए फटे कुर्ते से प्रधानमंत्री के मोहर निकाली औऱ पैड से लगाकर उस कागज पर ठोक दी।  पूरा थाना सस्पेंड कर दिया था।

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