बसंत पंचमी पर करें विधि, विधान से पूजा

विद्या की देवी मॉं सरस्वती

विद्या की देवी मॉं सरस्वती

छाया सिंह। बसंत पंचमी एक हिन्दू त्यौहार है। इस दिन विद्या की देवी मॉं सरस्वती की पूजा की जाती है। यह पूजा पूर्वी भारत, पश्चिमोत्तर बांग्लादेश, नेपाल और कई राष्ट्रों में बड़े उल्लास से मनायी जाती है। इस दिन सभी लोग पीले को वस्त्र धारण करते हैं। इस साल बसंत पंचमी 26 जनवरी, गुरुवार को मनाई जा रही है। इस बार की बसंत पंचमी काफी खास है क्योंकि इस साल एक नहीं बल्कि चार-चार शुभ योग बन रहे हैं। इस दिन मां सरस्वती की विधिवत पूजा करने का विधान है। तो चले जानते हैं, मां सरस्वती की पूजा करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
बसंत पंचमी 2023 का शुभ योग
शिव योग- 25 जनवरी को शाम 06 बजकर 15 मिनट से लेकर 26 जनवरी को दोपहर 03 बजकर 29 मिनट तक।
सिद्ध योग- 26 जनवरी को दोपहर 03 बजकर 29 मिनट से लेकर 27 जनवरी को दोपहर 01 बजकर 22 मिनट तक।
सर्वार्थ सिद्धि योग- शाम 06 बजकर 57 मिनट से लेकर 27 जनवरी को सुबह 07 बजकर 12 मिनट तक।
रवि योग- शाम 06 बजकर 57 मिनट से लेकर सुबह 07 बजकर 12 तक
बसंत पंचमी पर पूजा का शुभ मुहूर्त
माघ शुक्ल पंचमी 25 जनवरी को दोपहर 12 बजकर 34 मिनट से लेकर 26 जनवरी को सुबह सुबह 10 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। सरस्वती की पूजा करने के लिए शुभ मुहूर्त 26 जनवरी को सुबह 07 बजकर 12 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक।
मां सरस्वती की पूजन सामग्री
मां सरस्वती की तस्वीर या मूर्ति
पीले रंग के वस्त्र पहनाने के लिए
एक लकड़ी की चौकी
चौकी में बिछाने के लिए पीले रंग का कपड़ा
पीले रंग के फूल और माला
सफेद चंदन, रोली, सिंदूरआम का पत्ता
एक लोटा जल के लिए
एक पान, सुपारी, छोटी इलायची, लौंग
तुलसी दल
हल्दी
बेसन के लड्डू, बूंदी, मोतीचूर के लड्डू, मालपुआ, केसर की खीर, केसर का हलवा
कलावा या मौली
घी का दीपक
अगरबत्ती
बसंत पंचमी हवन के लिए सामग्री
एक हवन कुंड, आम की सूखी लकड़ियां
चंदन, बेल, नीम, मुलेठी, पीपल की लकड़ियां
गूलर की छाल, पलाश, अश्वगंधा और ब्राह्मी आदि
यज्ञ सामग्री
चावल, काला तिल, शक्कर, घी, जौ
एक सूखा नारियल या गरी का गोला
लाल कपड़ा नारियल लपेटने के लिए
रक्षा सूत्र

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