बच्चों के शोषण रोकने के सामान्य उपाय

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छाया सिंह : बाल शोषण के 24 लाख से अधिक मामले दर्ज किए, जिनमे से लगभग 80 प्रतिशत मामले 14 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों के थे। हमें न केवल बच्चों पर होने वाले शारीरिक और मानसिक हमलों को बल्कि भावनात्मक शोषण बच्चो के मानस को कैसे प्रभावित कर सकता है ये भी पता होना चाहिए।
शारीरिक शोषण-
जानबूझकर या अनजाने में किसी बच्चे को नुकसान पहुंचाना, जिससे उन्हें दीर्घकालिक शारीरिक चोट या मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, इसे भी शारीरिक शोषण के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है। शारीरिक शोषण के कुछ कृत्यों में शामिल है।

• नुकसान पहुंचाने के लिए बच्चे को मारना, जलाना या पीटना
• बच्चे को जोर से हिलाना
• बच्चे के डूबने पर दम घुटना
• विषाक्तता
• बच्चे को बांधना
• बच्चे को भोजन न देना दुर्व्यवहार का एक गैर-शारीरिक रूप है जिसमें मनोवैज्ञानिक या मौखिक दुर्व्यवहार शामिल हो सकता है। इस प्रकार का दुर्व्यवहार एक बच्चे को अवांछित, बेकार और प्यार रहित महसूस कराता है. इसमें ऐसे शब्द और कार्य शामिल हो सकते हैं, जो बच्चों में कम आत्मविश्वास, तनाव, चिंता, अवसाद और अनुशासनहीनता के कारण भावनात्मक क्षति का कारण बनते हैं. इसमें शामिल हो सकते हैं।
• अवास्तविक अपेक्षाएं स्थापित करना
• अपने बच्चे के कार्यों के प्रति अधिक निंदा करना
• उन्हें आपकी अपेक्षाओं पर खरे उतरने की धमकी देना
• बच्चों को कम आंकना या दूसरों से तुलना करना
• बच्चे की भावना को रद्द करना
• बच्चे के दायरों को कम करना

उपेक्षा करना-
बच्चों से उपेक्षा करना भी एक तरह का बाल शोषण है. जब एक माता-पिता अपने बच्चों की जरूरतों की देखभाल करने मे असमर्थ होते है तो वह बाल शोषण का दूसरा रूप है.
• बिना किसी देखभालकर्ता के बच्चों को अकेला छोड़ना
• ऐसा माहौल बनाना जहां बच्चा शारीरिक और योन शोषण का शिकार हो सके
• बच्चे को शिक्षा प्रदान कराने में सक्षम न होना