शिक्षा क्रांति पुंज हैं सावित्रीबाई फुले : प्रो. आशा शुक्ला, कुलपति

सावित्रीबाई फुले

सावित्रीबाई फुले


महू म.प्र.। राष्ट्र शिक्षिका सावित्रीबाई फुले महिला सशक्तीकरण की मिशाल हैं। महिला शिक्षा और सशक्तिकरण को लेकर सावित्रीबाई फुले द्वारा किया गए कार्य अनुकरणीय हैं। सावित्री बाई फुले ने विपरीत परिस्थितियों में समाज को सही दिशा प्रदान की। भारतीय स्त्री शिक्षा को व्यापक संदर्भों में देखते हुए हमें बार-बार सावित्रीबाई फुले के जीवन दर्शन और कार्यों से सीखने को मिलता है। शिक्षा की ज्योति जलाने के लिए प्रयासरत सावित्रीबाई फुले ने कई बालिका विद्यालय खोले। साथ ही उन्होंने सामाजिक कुरीतियों को दूर कर समाज सुधार के व्यापक फलक को विस्तार दिया। उक्त बातें ब्राउस कुलपति प्रो. आशा शुक्ला ने कही। महिला सशक्तीकरण की अग्रवाहिका सावित्रीबाई फुले की जयंती पर सोमवार को डॉ. बी. आर. अम्बेडकर सामाजिक विज्ञान विश्वविद्यालय में पुष्पांजलि एवं राष्ट्रीय वेब परिवाद का आयोजन किया गया। हमें सावित्रीबाई फुले के आदर्शों को जीवन में उतारने की जरुरत है। सावित्रीबाई फुले शिक्षा दृष्टि और सामाजिक सरोकार विषय पर राष्ट्रीय वेब परिसंवाद का आयोजन हुआ। राष्ट्रीय परिसंवाद सावित्रीबाई फुले पीठ, महिला अध्ययन विभाग, डॉ. अम्बेडकर पीठ तथा बाबू जगजीवन राम पीठ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ। इस कार्यक्रम में सावित्रीबाई उत्कृष्ट विद्यार्थी निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को प्रमाणपत्र प्रदान किया गया। प्रथम स्थान पर सरताज सिंह, पंजाब द्वितीय स्थान पर आकांक्षा कुरील, म.प्र., मोहित कुमार, उ.प्र. तथा तृतीय स्थान पर विनी जोशी, म.प्र. एवं हर्षल वसंत राव गोरे, महाराष्ट्र से रहे।
मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए जलगाँव की प्रो. शोभा शिंदे ने कहा कि सावित्रीबाई फुले ने मनुष्यता को जोड़ने का कार्य किया है। उन्होंने बाल विवाह, विधवा पुनर्विवाह, अंध विश्वास पर समाज को जागरूक किया। सावित्रीबाई फुले के कार्यों पर हमें निरंतर शोध करने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अधिष्ठाता प्रो. डी. के. वर्मा ने कहा कि सावित्रीबाई फुले की ही देन है कि देश में महिलाएं उच्च पदों पर विराजमान हैं तथा देश में हजारों स्कूल, कॉलेजों के माध्यम से लड़कियों को शिक्षा दी जा रही है। बाबू जगजीवन राम पीठ के आचार्य प्रो. शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने कहा की फुले दंपती ने 170 वर्ष पूर्व समाज में समानता के लिए विपरीत परिस्थितियों में जो कार्य किया, उसी से आज देश मजबूती के साथ खड़ा है। उन्होंने जड़ता के विरोध में सकारात्मक पहल की है।
डॉ. अम्बेडकर पीठ के आचार्य प्रो. देवाशीष देवनाथ ने कहा कि सावित्रीबाई महिला शिक्षा की प्रणेता एवं पथ प्रदर्शक रही हैं। उनके विचारों को आत्मसात कर हम नए भारत की संकलपना को विस्तार दे सकते हैं। पीठ प्रभारी डॉ. मनोज कुमार गुप्ता ने प्रस्तावना वक्तव्य तथा संचालन डॉ. रामशंकर ने किया। इस अवसर पर कुलसचिव डॉ. अजय वर्मा, अधिष्ठाता डॉ. मनीषा सक्सेना सहित ब्राउस परिवार के सदस्य उपस्थित रहे।

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