प्लेसेज ऑफ वर्शिप ऐक्ट : कानून पर मुहर लगाने वाले सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस चंद्रचूड़ ही करेंगे ज्ञानवापी मस्जिद की सुनवाई

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दीपक कुमार तिवारी : जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ 9 नवंबर 2019 को ऐतिहासिक अयोध्या मामले में फैसला सुनाने वाली पांच जजों के पीठ में शामिल थे, जिन्होनें प्लेसेज ऑफ वर्शिप ऐक्ट 1991 को अच्छा कानून बताते हुए उस पर मुहर लगाई थी। मंगलवार 17 मई को ज्ञानवापी मस्जिद मामले में सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पी एस नरसिम्हा की बेंच मामले की सुनवाई करेगी। ज्ञानवापी मस्जिद कमेटी ने याचिका में वाराणसी की अदालत के मस्जिद में सर्वे के आदेश को प्लेसेज ऑफ वर्शिप ऐक्ट 1991 का उल्लंघन बताया है।
एक अन्य जनहित याचिका में बीजेपी नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने कहा है कि प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट को खत्म किए जाने की मांग की गई है, ताकि इतिहास की गलतियों को सुधारा जाए और अतीत में इस्लामी शासकों द्वारा अन्य धर्मों के जिन-जिन पूजा स्थलों और तीर्थ स्थलों का विध्वंस करके उन पर इस्लामिक ढांचे बना दिए गए, उन्हें वापस उन्हें सौंपा जा सके जो उनका असली हकदार है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2021 में 1991 के प्लेसेज ऑफ वर्शिप ऐक्ट (उपासना स्थल कानून) की वैधता का परीक्षण करने पर सहमति जताई थी अदालत ने इस मामले में भारत सरकार को नोटिस जारी कर उसका जवाब मांगा था।
क्या है प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट
1991 मे देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री पी वी. नरसिंम्हा राव ने प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट यानी उपासना स्थल कानून बनाया था। कानून लाने का मकसद अयोध्या राम जन्मभूमि आंदोलन के बढ़ती तीव्रता और उग्रता को शांत करना था। सरकार ने कानून में यह प्रावधान कर दिया कि अयोध्या की बाबरी मस्जिद के सिवा देश की किसी भी अन्य जगह पर, किसी भी पूजा स्थल पर दूसरे धर्म के लोगों के दावे को स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसमें कहा गया कि 15 अगस्त, 1947 को कोई धार्मिक ढांचा या पूजा स्थल जहां, जिस रूप में भी था, उन पर दूसरे धर्म के लोग दावा नहीं कर पाएंगे।