रामशंकर, नोएडा/ग्रेटर नोएडा

उत्तर प्रदेश के बहुप्रतीक्षित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) से 15 जून 2026 से वाणिज्यिक उड़ानों का संचालन शुरू होने जा रहा है। यह एयरपोर्ट न केवल पश्चिमी उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के लिए एक बड़ा परिवहन केंद्र बनने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। लंबे समय से चल रहे निर्माण कार्य और विभिन्न तकनीकी मंजूरियों के बाद अब यह परियोजना अपने संचालन चरण में प्रवेश करने के लिए तैयार है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, एयरपोर्ट के पहले चरण में सीमित संख्या में उड़ानें संचालित की जाएंगी। शुरुआती दौर में मुख्य रूप से घरेलू उड़ानों को प्राथमिकता दी जाएगी और धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को भी जोड़ा जाएगा। नागरिक उड्डयन क्षेत्र की प्रमुख कंपनी IndiGo इस एयरपोर्ट से अपनी पहली उड़ान शुरू करेगी, जिससे इस परियोजना की औपचारिक शुरुआत होगी।

सूत्रों के अनुसार, प्रारंभिक चरण में लगभग 17 शहरों के लिए उड़ान कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जाएगी। इसमें देश के प्रमुख महानगरों और महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्रों को शामिल किया गया है। हालांकि “17 फ्लाइट्स” के दावे की बजाय विशेषज्ञ इसे “17 रूट या शहर” के रूप में अधिक सटीक मान रहे हैं। जैसे-जैसे यात्री संख्या और मांग बढ़ेगी, उड़ानों की संख्या में भी तेजी से वृद्धि की जाएगी।

एयरपोर्ट प्रबंधन के अनुसार, पहले चरण में प्रतिदिन सीमित उड़ानों का संचालन होगा, जो आगे चलकर 60 से 70 उड़ानों तक पहुंच सकता है। यह विस्तार चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा, ताकि यात्रियों को बेहतर सुविधाएं और सुरक्षित यात्रा अनुभव प्रदान किया जा सके। आधुनिक तकनीकों से लैस इस एयरपोर्ट में अत्याधुनिक टर्मिनल, रनवे और यात्री सुविधाएं विकसित की गई हैं, जो इसे देश के प्रमुख एयरपोर्ट्स की श्रेणी में लाने की क्षमता रखते हैं।

इस एयरपोर्ट के शुरू होने से इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर बढ़ते दबाव को कम करने में भी मदद मिलेगी। दिल्ली का यह प्रमुख एयरपोर्ट पिछले कुछ वर्षों में यात्रियों की संख्या में भारी वृद्धि का सामना कर रहा है, जिसके कारण वैकल्पिक एयरपोर्ट की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। ऐसे में जेवर एयरपोर्ट इस समस्या का प्रभावी समाधान बन सकता है।

स्थानीय स्तर पर भी इस परियोजना के कई सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेंगे। क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, साथ ही उद्योग और व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा। बेहतर कनेक्टिविटी के कारण निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी और ग्रेटर नोएडा तथा आसपास के इलाकों का समग्र विकास तेज होगा।

राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों ही इस परियोजना को “विकसित भारत” के दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना मान रही हैं। आने वाले वर्षों में यह एयरपोर्ट न केवल यात्रियों के लिए सुविधाजनक विकल्प बनेगा, बल्कि उत्तर भारत के आर्थिक विकास में भी अहम भूमिका निभाएगा।

कुल मिलाकर, 15 जून से शुरू होने जा रही उड़ानें नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए एक नई शुरुआत हैं, जो क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, आर्थिक विकास और आधुनिक परिवहन व्यवस्था की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होंगी।

About Post Author