राहत के बीच नए वैरिएंट ओमिक्रॉन ने बढ़ाई चिंता

ओमिक्रॉन

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देश में पिछले काफी दिनों से कोरोना संक्रमितों की संख्या में लगातार कमी देखने को मिल रही है, जो कि सभी के लिए एक अच्छी बात मानी जा सकती है। लेकिन यह ध्यान देने वाली बात है कि कोरोना का खतरा अभी टला नहीं है। लेकिन देश के सभी लोगों में एक बात देखने को मिल रही है कि हम सभी कोरोना को लेकर लापरवाह दिख रहे है जबकि खतरा अभी टला नहीं है। दूसरी तरफ अक्टूबर और नवंबर में जिस तीसरी लहर की आशंका जताई जा रही थी उसका भी असर भारत में देखने को नहीं मिल रहा है। यह सिर्फ उन प्रतिबंधों का असर कहा जा सकता है जिसे मोदी सरकार ने कड़ाई से लागू किया और इसमें सबसे महत्वपूर्ण भूमिका टीकाकरण की रफ्तार ने निभाई। जब से देश में टीकारण की शुरूआत हुई है तब से अब तक 1 अरब 23 करोड़ 25 लाख 02 हजार 767 डोज लोगों को लगाए गए जा चके हैं। कहने का मतलब है कि सरकार टीकाकरण को जिस तेजी से बढ़ाया उसमें विपक्ष की भी भूमिका महत्वपूर्ण रही। राहुल गांधी शुरू से ही केंद्र सरकार पर दबाव बनाए हुए थे कि मोदी सरकार टीके लगाने की गति में तेजी लाए।
अगर टीकाकरण अभियान जोर नहीं पकड़ता तो महामारी पर काबू पाना आसान नहीं था। हालांकि कुछ राज्यों विशेषकर केरल में अभी भी कोरोना मरीजों की तादाद ज्यादा है। इस पर नियंत्रण पाना जरूरी है अन्यथा कभी भी देश के अन्य हिस्सों में संक्रमितों की संख्या बढ़ सकती है। अब तक देखा गया है कि पिछले 2 सालों मे कोरोना वायरस ने कई मौकों पर अपना स्वरूप बदला है। चीन के वुहान शहर जिस वायरस ने पूरी दुनिया में तबाही मचाई अब नए-नए वेरिंएट के रूप में और भी खतरनाक और जानलेवा बन गया है। इसी कड़ी में नया वेरिएंट है ओमिक्रॉन जिसको विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी वेरिएंट ऑफ कंसर्न माना है।
कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन की दस्तक ने सभी देशों को चिंता में डाल दिया है। कोरोना का यह नया वैरिएंट अब तक दुनिया के 29 देशों में पहुंच चुका है और 373 औमिक्रॉन वेरिएंट मिल चुके है।
इससे सबसे ज्यादा चिंतित और चौंकाने होने वाली बात है यह है कि अमेरिका के कैलिफॉर्निया में जो व्यक्ति ओमिक्रॉन से संक्रमित हुआ है उसने कोविड वैक्सीन की दोनों लगवा ली हैं।
नए वैरिएंट को लेकर WHO का कहना है कि आने वाले दिनों में संक्रमितों की संख्या में इजाफा होना तय है। WHO की चीफ सांइटिस्ट डॉ. सौम्या स्वामीनाथ का कहना है कि पूरी दुनिया में इस वैरिएंट को लेकर युद्ध स्तर पर काम हो रहा है और जैसे-जैसे समय बीतेगा इसके बारे में अधिक जानकारी मिलनी शुरू हो जाएगी। उनका यह भी कहना है कि अब तक कोरोना के जितने भी वैरिएंट मिले है ऐसा अभी तक भी देखने को नहीं मिला कि वैक्सीन उन पर बिलकुल भी काम नहीं करे। दूसरी तरफ ओमिक्रॉन से पूरी दुनिया सहमी दिख रही है। नए कोरोना वैरिएंट का असर सबसे ज्यादा साउथ अफ्रीका में देखने को मिल रहा है क्योंकि माना जा रहा है कि सबसे पहले ओमिक्रॉन संक्रमित व्यक्ति की पहचान यहीं पर हुई थी। इस अफ्रीकी देश में काफी लोगों को कोरोना के नए वैरिएंट ने अपनी चपेट में ले लिया है। दक्षिण अफ्रीका की सरकार ने बढ़ते खतरे को देखते हुए लेवल वन का लॉकडाउन लगा दिया है। बाजार बंद होने के कारण सड़के सुनसान हो चुकी है एक बार फिर लोग अपने घर की चारदिवारी में कैद हो गए हैं। दूसरी तरफ भारत में भी ओमिक्रॉन वेरिएंट की एंट्री हो गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने हाल ही में बताया था कि देश में ओमिक्रोन के 2 मामले दर्ज किए गए हैं। ये मामले कर्नाटक में मिले हैं। उधर, दिल्ली एयरपोर्ट पर भी पिछले दिन चार यात्री कोरोना संक्रित मिले थे जिनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। वहीं गुरूवार को भी द. अफ्रीका से मुंबई पहुंच चार लोग भी कोरोना संक्रमित मिले जिनकी जीनोम सीक्वेंसिंग के लिए सैंपल भेजे गए हैं। खैर सरकार कोरोना के नए अवतार से निपटने के लिए जरूरी कदम उठा रही है लेकिन देश के सभी लोगों को एक बार फिर से सरकार से साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने जरूरत है और अभी से ही सावधान रहने की जरूरत है। बचाव संबंधी सभी उपायों का पूरी तरह पालन करते हुए टीके लगवाने चाहिए। जो लोग टीके से बचे हुए हैं, उनका तेजी से टीकाकरण किया जाना चाहिए। फिलहाल यही बचाव का सुरक्षा कवच है। अभी कई ऐसे राज्य हैं जहां पांच करोड़ से भी ज्यादा लोगों के टीके पहली डोज तक नहीं लगी है। अभी भी लोग टीका लगवाने से हिचकिया रहे हैं। यह उनके लिए और देश के लिए खतरा साबित हो सकता है।

राजतिलक शर्मा
लेखक- आईआईएमटी कॉलेज में पत्रकारिता एवं जनसंचार संकाय में का
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