आईआईएमटी विश्वविद्यालय में भारत-जर्मनी शैक्षणिक सहयोग को मिली नई दिशा, रिसर्च और स्टूडेंट एक्सचेंज पर हुआ मंथन
राजतिलक शर्मा, ग्रेटर नोएडा। आईआईएमटी विश्वविद्यालय, ग्रेटर नोएडा कैंपस में भारत और जर्मनी के बीच उच्च शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को नई दिशा देने के उद्देश्य से एक अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। “उच्च शिक्षा, रिसर्च और इनोवेशन में भारत-जर्मन सहयोग की मजबूती” विषय पर आयोजित कार्यक्रम में दोनों देशों के शिक्षाविदों ने शोध, स्टूडेंट एक्सचेंज, फैकल्टी सहयोग और इंडस्ट्री-एकेडमिक साझेदारी को मजबूत बनाने पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम में जर्मनी के बाडेन-वुर्टेमबर्ग राज्य स्थित रीउट्लिंगन विश्वविद्यालय के साथ शैक्षणिक सहयोग को नई गति देने पर विशेष जोर दिया गया। प्रतिनिधिमंडल में सेंट गैलेन विश्वविद्यालय, स्विट्जरलैंड के परियोजना निदेशक अलेक्जेंडर रोसमैन, रीउट्लिंगन विश्वविद्यालय, जर्मनी के वाइस डीन प्रो. डॉ. इंजी. जोचेन ब्रून, रीउट्लिंगन विश्वविद्यालय के नॉलेज फाउंडेशन के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर डैनियल गीगिस तथा आईईएस ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर राज वंगापंडु शामिल रहे।
आईआईएमटी विश्वविद्यालय के प्रो-चांसलर डॉ. मयंक अग्रवाल ने सभी विदेशी अतिथियों का पारंपरिक भारतीय संस्कृति के अनुरूप स्वागत करते हुए स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि आज उच्च शिक्षा का भविष्य वैश्विक सहयोग, अनुसंधान और नवाचार पर आधारित है। आईआईएमटी विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा, संयुक्त शोध परियोजनाओं और स्टूडेंट एक्सचेंज के अधिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि रीउट्लिंगन विश्वविद्यालय के साथ यह सहयोग विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए वैश्विक अवसरों का नया द्वार खोलेगा तथा भारत और जर्मनी के बीच शैक्षणिक संबंधों को और मजबूत करेगा।
