पाकिस्तान में संगीतकारों को समझा जाता है काफिर-फ़राज़ अनवर

पाकिस्तान

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नेहा सिंह-पाकिस्तान के संगीतकार, गीतकार, गिटारिस्ट व बैंडलीडर रहे फ़राज़ अनवर ने “द ट्रिब्यून” को दिए अपने इंटरव्यू में अपने साथ अपने ही देश में हुए बुरे व्यव्हार की बात कही। उन्होनें बताया कि कैसे उन्हें पाकिस्तान में म्यूज़िक स्टूडियो खोलने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ा था। उनके साथ आए दिन ऐसे ही वाक़िआत पेश आते थे। उन्हें घर खरीदते वक्त भी आर्टिस्ट होने के सबब मुश्किलों को सामना करना पड़ा। एक बार जब वे बैंक अकाउंट खुलवाने के लिए वहां के कर्मचारी के पास गए तो पता चला कि उनकी दरख़्वास्त खारिज़ कर दी गई है, वजह पूछने पर जवाब आया “क्योंकि वे म्यूज़िक आर्टिस्ट हैं”।


उनके मुताबिक़ पाकिस्तान में लोग उन्हें काफिर कहने से भी नहीं चूकते हैं। आगे वे बताते हैं कि ऐसा इसलिए है क्योंकि यहां के लोग कट्टर धार्मिक हैं और तथाकथित तौर पर क़ुरान में संगीत को हराम माना जाता है। उन्होनें इस सोच पर अफ़सोस भी जताया।

उन्होनें आगे हिंदुस्तान का ज़िक्र करते हुए कहा कि हिंदुस्तान में मुझे बहुत सम्मान मिलता है। यहां के लोग मेरे पैर छूते हैं । लेकिन मेरे अपने ही देश में मुझे काफ़िर और न जाने किन-किन नामों से पुकारा जाता है। वे कहते हैं कि उन्होनें कुरान में संगीत के हराम होने की बात सुनकर “कुरान” को अलग अलग पांच भाषाओं में पढ़ लिया। और उन्हें ऐसा कहीं भी लिखा नहीं मिला।

फ़राज़ ने ज़िक्र किया कि यहां पर धार्मिक कट्टरवादियों को उनसे डर लगता है कि वे अपने संगीत और गीतों के ज़रिए उनका सच सामने ला देंगे। इसलिए यही लोग आम लोगों में उनके ख़िलाफ बातें फैलाते हैं।


उन्होनें आगे जुनैद जमशेद को एयरपोर्ट पर थप्पड़ मारे जाने और अमजद साबरी की दिनदहाड़े हत्या का भी मुद्दा उठाया। फराज़ ने इन सब बातों के ज़रिए पाकिस्तान लोगों की कलाकारों के लिए ज़हनियत का पर्दाफ़ाश कर दिया।