कोविड के दौर में भी भारत ने बनायी सुगम राह


एक अरब का कोविड टीकाकरण कर भारत ने एक ऐतिहासिक लक्ष्य को प्राप्त करने के दिशा में मजबूती से कदम बढ़ा दिया है। सरकार की सुनियोजित नीति और कोरोना वारियर्स की प्रतिवद्धताओं व लोगों की भागीदारी के बिना यह मुमकिन नहीं था। 100 करोड़ का कोविड टीकाकरण यह दर्शाता है कि भारत अपनी विकास वाली प्राथमिकताओं से डिगने वाला नहीं है और वह कोरोना महामारी के चलते उसमें आयी रूकावट को काफी हद तक दूर करने में कामयाबी के साथ आगे बढ़ रहा है।


यह सब इतना आसान नहीं था। कोरोना महामारी नवम्बर 2019 में जब चाइना से अपने पांव पसारे तो इसके विनाशक रूप को देखकर पूरी दुनिया स्तब्ध थी। कोई भी दवा इस वायरस को कमजोर करने के लिए नाकाफी थी। ऐसे में उसने पूरी दुनिया को अपने आगोश में ले लिया और भारी धन और जन की हानि हुई। भारत भी इससे अछूता नहीं था। मार्च 2020 में मेडिकल इंफ्रास्ट्रचर की कमी और आधी-अधूरी तैयारियों के बावजूद लॉकडाउन की सख्ती और लोगों की जागरूकता ने नुकसान की दर को अन्य देशों की तुलना में काफी कम किया था। यहीं हम से चूक हो गई। कुछ राजनेताओं ने तो यहां तक ऐलान कर दिया कि भारत ने कोरोना पर विजय प्राप्त कर ली। हम हद से ज्यादा लापरवाह हो गये। जनवरी 2021 में कोरोना का टीकाकरण शुरू हो जाने के बाद भी हमारे कोरोना वारियर्स तथा सीनियर सिटीजन ने इस टीकाकरण में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई। स्वास्थ्यकर्मियों को बुलाकर टीकाकरण कराया जा रहा था, फिर भी कईयों ने बहाने से टीकाकरण के लिए नहीं आये। उसके बाद 45 वर्ष से ऊपर के लोगों का भी टीकाकरण शुरू हुआ, लेकिन लोगों में कोई खास उत्साह नजर नहीं आया। टीकाकरण होने के बाद भी लोगों की इसके प्रति उदासीनता का खामियाजा सभी ने भुगता और मार्च 2021 आते-आते कोरोना ने फिर से अपने रौद्र रूप दिखाने शुरू कर दिये। इससे काफी धन और जनहानि हुई। उसके बाद से लोगों में जागरूकता बढ़ी और सरकार ने भी 18 वर्ष से ऊपर के लोगों का टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया। कोरोना से हुई बड़ी जनहानि से उबर रहे लोगों विशेषकर 18 वर्ष के ऊपर के नौजवानों ने टीकाकरण में बढ़ चढ़कर भागीदारी की और परिणाम सबके सामने 100 करोड़ के टीकाकरण के रूप में स्पष्ट देखने को मिल रहा है।


हांलाकि यह कोरोना महामारी से लड़ने के लिए जंग का एक पड़ाव भर है, अभी लड़ाई और कई मोर्चों पर लड़नी है। कोरोना के तीसरे दौर की आशंका भी बरकरार है। हमारे 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे अभी टीकाकरण से अछूते हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं की तैयारियां अभी भी मुकम्मल नहीं हैं। यह सारी बाधाओं को दूर करने के लिए 100 करोड़ के टीके के संकल्प को और आगे बढ़ाये जाने की जरूरत है। इसमें लापरवाही कोरोना के फर्स्ट और सेकेण्ड वेव यानी पहली और दूसरी लहर से ज्यादा खतरनाक हो सकती है, क्योंकि तीसरी लहर से सबसे अधिक नुकसान टीकाकरण से बचे रह गये हमारे बच्चों पर पड़ना तय हैं। इस स्थित को निपटने के लिए बच्चों के लिए वैक्सीन उत्पादन के साथ-साथ टीकाकरण कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की जरूरत है। तभी नये भारत की उम्मीदों को पंख लग सकेंगे।