प्रफुल्ल शर्मा (ग्रेटर नोएडा)

कल बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण की वोटिंग होने जा रही है। जिसमें कुल 122 सीटों पर टक्कर अपने चरम पर है। इस चरण में 1300 से ज़्यादा विधानसभा उम्मीदवार अपनी किस्मत आज़मा रहे हैं। करीबन 4 करोड़ मतदाता अपने वोट का अधिकार इस्तेमाल कर मतदान करने के लिए तैयार हैं। पहले चरण के बाद बिहार की राजनीति और भी गर्म हो चुकी है।

बिहार चुनाव के 6 बड़े पहलू जो हैं बडे मुद्दे हैं जो बिहार चुनावों की साख को ताक पर रखेंगी।

तुष्टिकरण की राजनीति – बिहार की राजनीति में तुष्टिकरण यानी वोट बैंक की राजनीति कोई नई बात नहीं है। हर चुनाव में जातीय और धार्मिक समीकरणों को साधने की कोशिशें होती हैं। कहीं यादव वोट बैंक, कहीं कुर्मी समीकरण, कहीं दलित और मुसलमान कार्ड। इस बार भी हर पार्टी अपने पुराने वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश में है। क्या मतदाता अब भी जाति और धर्म के नाम पर वोट करेंगे, या फिर विकास और रोजगार के मुद्दों को अहमियत देंगे? 2025 का ये चुनाव ये तय करेगा कि बिहार की राजनीति में सोच बदली है या नहीं।

दुसरा पहलु पहले चरण की वोटिंग की धारणा

“पहले चरण की वोटिंग ने कई नए संकेत दिए हैं।गांवों में जोश दिखा, लेकिन शहरों में मतदाताओं की संख्या कुछ कम रही। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार युवा वर्ग और पहली बार वोट करने वाले मतदाता रोजगार और सुविधा’ को लेकर ज़्यादा सजग हैं। लोग अब कह रहे हैं — वोट उसी को देंगे जो काम करेगा, न कि जो सिर्फ वादे करेगा! अब दूसरे चरण में देखना ये होगा कि ये जागरूकता वोट प्रतिशत में कैसे दिखती है।”

तीसरा पहलु कितनी पार्टियां मैदान में हैं?

बिहार चुनाव 2025 एक बहुकोणीय मुकाबला बन गया है।मुख्य रूप से एनडीए, महागठबंधन, और कुछ नए क्षेत्रीय गठबंधन मैदान में हैं। जेडीयू और बीजेपी फिर साथ हैं, जबकि आरजेडी अपने गढ़ को बचाने की कोशिश में है। कांग्रेस और एलजेपी (रामविलास) भी अपने वोट शेयर के लिए संघर्षरत हैं। इस बार मुकाबला सीधा नहीं, बल्कि त्रिकोण और चतुष्कोण में बदल चुका है। हर सीट पर समीकरण अलग हैं, और यही बिहार चुनाव की सबसे बड़ी दिलचस्पी है।”

चौंथा पहलु क्या तेजप्रताप यादव बीजेपी में जा सकते हैं? “बिहार की राजनीति में सबसे बड़ी चर्चा ये है —

क्या तेजप्रताप यादव बीजेपी में शामिल हो सकते हैं?आरजेडी नेता तेजप्रताप अपने बयानों से अकसर पार्टी लाइन से अलग जाते रहे हैं। हाल ही में कुछ ऐसे बयान आए हैं जिनसे राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जा रहे हैं कि वो नए समीकरण बना सकते हैं।

बीजेपी के कुछ नेताओं ने भी उनके प्रति ‘सॉफ्ट कॉर्नर’ दिखाया है। हालांकि, अभी तक किसी पक्ष से आधिकारिक बयान नहीं आया। लेकिन बिहार की राजनीति में ये चर्चा आग की तरह फैल चुकी है

पहलु पांच बिहार का एजेंडा 2025

हर चुनाव की तरह इस बार भी मुद्दों की भरमार है, लेकिन बिहार का असली एजेंडा 2025 में क्या होना चाहिए? लोग कह रहे हैं — रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचा। यही वो चार मुद्दे हैं जो हर बिहारवासी के दिल में हैं। महागठबंधन ‘नए बिहार’ का वादा कर रहा है, वहीं एनडीए कह रहा है कि ‘विकास और स्थिरता’ ही रास्ता है। युवा पीढ़ी साफ कह रही है हमें नारा नहीं, नौकरी चाहिए। वादा नहीं, बदलाव चाहिए।

छटा पहलु निष्कर्ष तो दोस्तों, बिहार चुनाव 2025 सिर्फ एक राजनीतिक जंग नहीं —

बल्कि यह बिहार की सोच और दिशा तय करने वाला चुनाव है। एक ओर पुराने नेता अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश में हैं, दूसरी ओर नई पीढ़ी अपने भविष्य के लिए नई राह ढूंढ रही है। कल होने वाली दूसरे चरण की वोटिंग के बाद तस्वीर और साफ होगी।

बिहार विधानसभा चुनाव में पहले चरण के मतदान में 3.75 करोड़ मतदाताओं में से 66.44 प्रतिशत मतदान हैं। बिहार चुनाव एक तरफ से बाहुबलीयों के चुनाव के समीकरण का भी निष्कर्ष हैं।

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