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बच्चों में चाय-कॉफी की बढ़ती आदत बन सकती है सेहत के लिए खतरा

रोशनी शंकर (ग्रेटर नोएडा)

भारत में चाय और कॉफी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा हैं, लेकिन जब छोटे बच्चे भी इसका नियमित सेवन करने लगें तो यह चिंता का कारण बन जाता है। अक्सर घर के बड़े लोग बच्चों के सामने चाय-कॉफी पीते हैं, जिससे बच्चे भी इसकी मांग करने लगते हैं और धीरे-धीरे यह उनकी दिनचर्या में शामिल हो जाती है। खासकर 10 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए यह आदत नुकसानदायक मानी जाती है।

चाय और कॉफी में मौजूद कैफीन बच्चों पर बड़ों की तुलना में ज्यादा असर डालता है। थोड़ी सी मात्रा भी बच्चों की नींद की अवधि और गहराई को प्रभावित कर सकती है। नींद पूरी न होने से बच्चों की शारीरिक बढ़त, रोग प्रतिरोधक क्षमता और रोजमर्रा के व्यवहार पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इसके अलावा चाय में पाए जाने वाले कुछ तत्व शरीर में जरूरी पोषक तत्वों, खासकर आयरन, के अवशोषण में बाधा डालते हैं। इससे बच्चों में आयरन की कमी हो सकती है, जो आगे चलकर कमजोरी और एनीमिया जैसी समस्याओं का कारण बन सकती है। कैफीन का असर बच्चों के नर्वस सिस्टम पर भी पड़ता है, जिससे चिड़चिड़ापन और पढ़ाई में ध्यान न लगने की शिकायत सामने आ सकती है।

मीठी चाय या कॉफी बच्चों के दांतों के लिए भी नुकसानदायक होती है। अधिक चीनी से दांतों में कीड़े लगने, दांत कमजोर होने और कम उम्र में दंत समस्याएं बढ़ने का खतरा रहता है। साथ ही इससे बच्चों को बेकार कैलोरी मिलती है, जो सेहत के लिए फायदेमंद नहीं होती। इसलिए बच्चों की डाइट में चाय-कॉफी की जगह दूध, पानी और पौष्टिक पेयों को प्राथमिकता देना बेहतर माना जाता है।

डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी तरह की समस्या या लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।

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