विश्व टीकाकरण दिवस पर खास, जानिए भारत की वैक्सीन यात्रा और चार अहम किताबों का योगदान
रोशनी शंकर (ग्रेटर नोएडा)
आज विश्व टीकाकरण दिवस के अवसर पर भारत न केवल अपनी चिकित्सा उपलब्धियों का जश्न मना रहा है, बल्कि वैक्सीन विकास के लंबी और समृद्ध इतिहास को भी याद कर रहा है। भारत की वैक्सीनेशन यात्रा को समझने में चार महत्वपूर्ण पुस्तकों ने ज्ञान, शोध और ऐतिहासिक तथ्यों का मजबूत आधार तैयार किया है।
सबसे पहले, “India’s Vaccine Growth Story: From Cowpox to Vaccine Maitri” (इंडियाज़ वैक्सीन ग्रोथ स्टोरी: फ्रॉम काउपॉक्स टू वैक्सीन मैत्री) भारत की 200 साल पुरानी वैक्सीन यात्रा को विस्तार से बताती है। इस पुस्तक में काउपॉक्स टीके से लेकर आज की वैक्सीन मैत्री पहल तक देश की उपलब्धियों को दर्ज किया गया है। यह बताती है कि कैसे भारत आज विश्व का सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक देश बनकर उभरा है।
दूसरी ओर, भारतीय बाल चिकित्सा अकादमी की IAP Textbook of Vaccines (आईएपी टीकों की पाठ्यपुस्तक) स्वास्थ्यकर्मियों और डॉक्टरों के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सबसे विश्वसनीय मार्गदर्शक मानी जाती है। इसमें भारत के यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम, कोल्ड चेन और टीकों की कार्यप्रणाली जैसी मूलभूत बातें शामिल हैं।
इसी क्रम में IAP Purple Book: Immunization 2022–23 (आईएपी पर्पल बुक: टीकाकरण 2022–23) भारत की बदलती टीकाकरण जरूरतों और नए वैक्सीन शेड्यूल को सरल भाषा में प्रस्तुत करती है। यह वर्ष-दर-वर्ष अपडेट होने वाली एक ऐसी गाइड है जो भारत में टीकाकरण के प्रैक्टिकल पहलुओं को सामने लाती है।
वहीं “Shitala: The Indian Origins of Vaccination” (शीतला: टीकाकरण की भारतीय जड़ें) भारत की प्राचीन वैक्सीनेशन परंपराओं पर प्रकाश डालती है। यह पुस्तक बताती है कि भारत में variolation यानी चेचक के टीके जैसी प्रथा सदियों से मौजूद थी, जो आधुनिक टीकाकरण से पहले की सबसे प्रमुख व्यवस्था थी।
विश्व टीकाकरण दिवस के मौके पर ये सभी पुस्तकें यह याद दिलाती हैं कि भारत की वैक्सीन यात्रा सिर्फ वैज्ञानिक विकास की कहानी नहीं, बल्कि परंपरा, तकनीक और वैश्विक मानवता की साझी विरासत भी है। टीकाकरण को समझने और अपनाने के लिए ये किताबें भारत को वैज्ञानिक रूप से जागरूक और विश्व स्तर पर नेतृत्वकारी भूमिका निभाने में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं।
