सेल्फ मेडिकेशन बढ़ा रहा खतरा, एंटीबायोटिक अब हो रहीं बेअसर

रोशनी शंकर (ग्रेटर नोएडा)

आजकल लोग मामूली बुखार, खांसी या गले में खराश होने पर खुद ही एंटीबायोटिक दवाएं लेना शुरू कर देते हैं। जल्दी राहत पाने की यह आदत आगे चलकर बड़ी समस्या का कारण बन सकती है। डॉक्टर लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि बिना सलाह के दवा लेने का ट्रेंड न सिर्फ सेहत को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि आम इंफेक्शन को भी इलाज के प्रति जिद्दी बना रहा है।

पिछले कुछ वर्षों में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस तेजी से बढ़ा है। विशेषज्ञों का कहना है कि एंटीबायोटिक का गलत या अधूरा इस्तेमाल बैक्टीरिया को मजबूत बना देता है, जिसके बाद साधारण दवाएं भी असर नहीं करतीं। पटना की इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. अमृता गुप्ता के अनुसार, कई मरीज ऐसे मिल रहे हैं जिनके हल्के इंफेक्शन भी बेसिक दवाओं से ठीक नहीं हो रहे। इसका सीधा मतलब है कि गलत दवा-प्रयोग ने बैक्टीरिया को रूप बदलने का मौका दे दिया है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) ने भी एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस को दुनिया के बड़े स्वास्थ्य खतरों में शामिल किया है। भारत में यह समस्या इसलिए और बढ़ रही है क्योंकि यहां कई लोग बिना प्रिस्क्रिप्शन दवाएं ले लेते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि यह केवल एक व्यक्ति की भूल नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए खतरा बन सकता है क्योंकि दवा-रोधी बैक्टीरिया एक से दूसरे में तेजी से फैलते हैं।

एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि एंटीबायोटिक बिना डॉक्टर की राय के न लें, घर में बची हुई दवाएं दोबारा न खाएं और यदि दवा दी गई है तो उसका कोर्स अधूरा न छोड़ें। साधारण वायरल बुखार, जुकाम या खांसी में एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती। सही निदान और सही उपचार ही आपको अनावश्यक दवा के दुष्प्रभावों से बचा सकता है।

डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी तरह की समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह लें।

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