NEET परीक्षा रद्द, बिहार में 60 लाख की डील का खुलासा; गेस पेपर के 120 सवाल मिले हूबहू

रामशंकर, ग्रेटर नोएडा। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET एक बार फिर विवादों के केंद्र में आ गई है। पेपर लीक, सॉल्वर गैंग और करोड़ों रुपये के अवैध नेटवर्क के खुलासे के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा रद्द करने का बड़ा फैसला लिया है। बिहार से शुरू हुई जांच में ऐसे चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, बिहार में कुछ अभ्यर्थियों को मेडिकल कॉलेज में प्रवेश दिलाने के नाम पर करीब 60 लाख रुपये तक की डील की गई थी। आरोप है कि उम्मीदवारों की जगह परीक्षा में सॉल्वर बैठाने की तैयारी थी। इस पूरे नेटवर्क का संचालन एक MBBS छात्र कर रहा था, जिसे पुलिस ने इस रैकेट का मास्टरमाइंड बताया है। बताया जा रहा है कि आरोपी छात्र पहले से सक्रिय सॉल्वर गैंग और कोचिंग नेटवर्क के संपर्क में था।

जांच के दौरान पुलिस और आर्थिक अपराध इकाई को एक संदिग्ध “गेस पेपर” भी मिला। सबसे बड़ा खुलासा यह हुआ कि उसमें दिए गए 410 सवालों में से करीब 120 सवाल NEET परीक्षा में हूबहू पूछे गए थे। इस तथ्य ने पेपर लीक की आशंका को और मजबूत कर दिया। जांच एजेंसियों का मानना है कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र के कुछ हिस्से चुनिंदा लोगों तक पहुंचाए गए थे।

सूत्रों के अनुसार, परीक्षा से एक दिन पहले कुछ अभ्यर्थियों को सुरक्षित ठिकानों पर रखा गया था, जहां उन्हें संभावित प्रश्न और उत्तर रटवाए जा रहे थे। कई मोबाइल फोन, दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किए गए हैं। जांच में कुछ कोचिंग संचालकों और परीक्षा केंद्रों से जुड़े लोगों की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है। CBI अब बिहार समेत कई राज्यों में फैले नेटवर्क की जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि प्रश्नपत्र किस स्तर से लीक हुआ और इसमें किन-किन लोगों की संलिप्तता रही। जांच का दायरा अब परीक्षा केंद्रों, प्रिंटिंग सिस्टम, तकनीकी एजेंसियों और कोचिंग संस्थानों तक बढ़ाया गया है।

पेपर लीक की खबर सामने आने के बाद देशभर के लाखों छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। छात्रों का कहना है कि उन्होंने वर्षों की मेहनत और तैयारी के बाद परीक्षा दी थी, लेकिन धांधली के कारण उनका भविष्य प्रभावित हुआ है। कई छात्र संगठनों ने निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने पूरी परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाया है। उनका कहना है कि केवल परीक्षा रद्द करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि तकनीकी सुरक्षा, निगरानी और जवाबदेही को मजबूत करना भी जरूरी है।

सरकार ने आश्वासन दिया है कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। CBI की जांच रिपोर्ट आने के बाद कई बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल देशभर के लाखों छात्र नई परीक्षा तिथि और आगे की प्रक्रिया को लेकर संशय की स्थिति में हैं।

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