Site icon IIMT NEWS, Hindi news, हिंदी न्यूज़ , Hindi Samachar, हिंदी समाचार, Latest News in Hindi, Breaking News in Hindi, ताजा ख़बरें

राष्ट्रीय मिर्गी दिवस पर विशेष, जागरूकता की कमी के कारण भारत में लाखों मरीज अब भी इलाज से वंचित

रोशनी शंकर (ग्रेटर नोएडा)

भारत में हर साल 17 नवंबर को राष्ट्रीय मिर्गी दिवस मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य मिर्गी से जुड़े मिथकों, सामाजिक कलंक और भेदभाव को दूर करना तथा लोगों को इस रोग के वैज्ञानिक तथ्यों और उपचार विकल्पों के बारे में जागरूक करना है।

एपिलेप्सी फाउंडेशन ऑफ इंडिया (EFI) द्वारा शुरू की गई इस पहल को देशभर में शिक्षा संस्थानों, चिकित्सा संगठनों और स्वास्थ्य विभागों का व्यापक सहयोग मिलता है। संस्थापक डॉ. निर्मल सूर्या (डॉ. एन.एम. वल्ली) ने मिर्गी मरीजों के समर्थन और जागरूकता को बढ़ाने के लिए इस अभियान की शुरुआत की थी।

क्या है मिर्गी?

मिर्गी एक पुराना न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जिसमें मस्तिष्क की कोशिकाओं में अचानक विद्युत गतिविधि बढ़ जाने से बार-बार दौरे पड़ते हैं। लक्षणों में शरीर में झटके, जकड़न, चक्कर, बेहोशी और कभी-कभी मुंह से झाग आना शामिल हो सकते हैं।

भारत और दुनिया में स्थिति

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया भर में 5 करोड़ से अधिक लोग मिर्गी से पीड़ित हैं। भारत में इसके मरीजों की संख्या लगभग 60 लाख है। विशेषज्ञों का कहना है कि देश में अब भी लगभग 75% मरीजों को समय पर और पर्याप्त इलाज नहीं मिल पाता, जिसकी बड़ी वजह जागरूकता की कमी और सामाजिक कलंक है।

इलाज और देखभाल

हालांकि मिर्गी का स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन दवाओं, सर्जरी और कीटोजेनिक डाइट जैसी रणनीतियों से दौरे काफी हद तक नियंत्रित किए जा सकते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि समय पर इलाज और पारिवारिक सहयोग से मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं।

देशभर में जागरूकता कार्यक्रम

राष्ट्रीय मिर्गी दिवस पर अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों और स्वास्थ्य संगठनों की ओर से कार्यशालाएं, सेमिनार और जन-जागरूकता अभियानों का आयोजन किया गया है। जिसमें मिर्गी के कारणों, लक्षणों, प्राथमिक उपचार और दीर्घकालिक देखभाल के बारे में जानकारी दी गई।

इस दिवस का मुख्य संदेश, लोगों में जागरूकता फैलाना है। इसके साथ, उन्हें यह बताना भी कि, मिर्गी अंधविश्वास नहीं है। यह एक चिकित्सीय स्थिति है। समय पर उपचार और सही जानकारी से हर मरीज सम्मानजनक और सामान्य जीवन जी सकता है।

Exit mobile version