जानिए कौन है भारत का “बर्डमैन”

रोशनी शंकर (ग्रेटर नोएडा)

भारत के प्रसिद्ध पक्षी विज्ञानी और पर्यावरण संरक्षक डॉ. सलीम मोइज़ुद्दीन अब्दुल अली को आज भी देश “पक्षी पुरुष” के रूप में याद करता है। मुंबई में जन्मे डॉ. अली ने भारत में पक्षी-वेध और संरक्षण को एक संगठित रूप दिया और अपने शोध से पक्षियों की दुनिया को नए दृष्टिकोण से समझाया।

युवा अवस्था में बर्मा प्रवास के दौरान भी उनकी रुचि पक्षियों के व्यवहार और प्रवासन में बनी रही। बाद में उन्होंने जर्मनी से पक्षी-विज्ञान का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया और लौटकर भारत में इस क्षेत्र में गहन अध्ययन किया। उन्होंने पक्षियों को सुरक्षित पकड़ने की कई तकनीकें विकसित कीं, जिनका उपयोग आज भी वैज्ञानिक करते हैं। डॉ. अली की लिखी किताबें, विशेषकर भारतीय उपमहाद्वीप की पक्षी-प्रजातियों पर आधारित रचनाएँ, न केवल वैज्ञानिकों बल्कि आम लोगों के बीच भी लोकप्रिय रहीं। भरतपुर पक्षी विहार सहित कई प्राकृतिक अभयारण्यों के संरक्षण में उनका विशेष योगदान रहा। सरकार ने उनके अद्वितीय योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें देश के उच्च नागरिक सम्मान से सम्मानित किया। 27 जुलाई 1987 को उनके निधन के बावजूद, उनका कार्य आज भी भारत में जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण का आधार बना हुआ है।

डॉ. सलीम अली की जीवन-यात्रा और उनका समर्पण आज भी शिक्षकों, विद्यार्थियों और प्रकृति-प्रेमियों के लिए प्रेरणा स्रोत है। उनके प्रयासों ने न केवल पक्षियों के अध्ययन को नई दिशा दी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकृति से जुड़ने की चेतना भी जगाई।

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