रोशनी शंकर (ग्रेटर नोएडा)
भारत में पूजा-पाठ और घर की खुशबू के लिए रोजाना कई घरों में अगरबत्ती जलाई जाती है। लेकिन कई लोग यह नहीं जानते कि रोजाना अगरबत्ती जलाना स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार अगरबत्ती का धुआं सिगरेट के धुएं से भी अधिक हानिकारक हो सकता है।
रोजाना अगरबत्ती जलाने से पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे सूक्ष्म कण और VOCs (वॉलेटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड्स) निकलते हैं। ये कण फेफड़ों में जमकर सूजन, एलर्जी और सांस की परेशानियां बढ़ा सकते हैं। खासकर जब कमरे में वेंटिलेशन कम हो, तो यह धुआं घर के अंदर ही जम जाता है। इंटरनेशनल रिसर्च के मुताबिक, अगरबत्ती जलाने से घर के अंदर पीएम 2.5 का स्तर सुरक्षित सीमा से अधिक बढ़ सकता है। लंबे समय तक यह फेफड़ों की गंभीर बीमारियों जैसे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, सीओपीडी और यहां तक कि कैंसर का खतरा बढ़ा देता है।
अगरबत्ती के धुएं से आंख, नाक और गले में जलन हो सकती है, साथ ही एलर्जी, साइनस और खांसी की समस्या भी बढ़ सकती है। धुएं में बेंजीन, फॉर्मल्डिहाइड और पीएम 2.5 जैसे हानिकारक रसायन होते हैं, जो फेफड़ों और रक्त कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि अगरबत्ती जलाते समय कमरे की खिड़कियां और दरवाजे खुला रखें और पंखा ऑन करें। इसके अलावा, अगरबत्ती की जगह देसी घी का दीपक या प्राकृतिक एसेंशियल ऑयल डिफ्यूजर का इस्तेमाल करना भी सुरक्षित विकल्प है।
डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी तरह की समस्या या सवाल के लिए हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह लें।

