जिला कारागार गौतमबुद्ध नगर बना आत्मनिर्भरता और पुनर्वास का मॉडल, कृषि नवाचार से 8 पुरस्कार हासिल


राजतिलक शर्मा

(ग्रेटर नोएडा) जनभवन, लखनऊ में आयोजित शाक-भाजी एवं पुष्प प्रदर्शनी में जिला कारागार गौतमबुद्ध नगर ने केवल पुरस्कार ही नहीं जीते, बल्कि बंदियों के पुनर्वास और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक नई मिसाल भी पेश की। कारागार परिसर की 21.50 एकड़ कृषि भूमि पर आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धतियों से की गई खेती ने सभी का ध्यान आकर्षित किया और कारागार को प्रथम स्थान दिलाया।
प्रदर्शनी में उत्कृष्ट शाक-भाजी एवं मशरूम उत्पादन के लिए जिला कारागार को कुल 8 पुरस्कार प्राप्त हुए। इनमें गाजर और चुकन्दर के लिए प्रथम स्थान, आलू और बैंगन के लिए द्वितीय स्थान तथा कद्दू, मूली, सलाद और प्याज-मशरूम के लिए तृतीय स्थान शामिल हैं।
इस उपलब्धि के पीछे कारागार में चल रहे श्रम-कौशल विकास कार्यक्रमों और बंदियों को कृषि कार्यों से जोड़ने की पहल को प्रमुख कारण माना जा रहा है। खेती के माध्यम से बंदियों को न केवल रोजगारपरक प्रशिक्षण मिल रहा है, बल्कि आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा भी मिल रही है, जो उनके पुनर्वास में सहायक साबित हो रही है।
इस अवसर पर कारागार अधीक्षक बृजेश कुमार को राज्यपाल द्वारा “चल वैजयंती” से सम्मानित किया गया। कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान ने भी उनके प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें सम्मानित किया। महानिदेशक कारागार पी.सी. मीणा (आईपीएस) ने इसे सुधारात्मक प्रशासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कारागार प्रशासन की प्रशंसा की।
जिला कारागार गौतमबुद्ध नगर की यह सफलता आधुनिक कृषि, कौशल विकास और बंदियों के सकारात्मक पुनर्वास की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरी है।

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