दिल्ली के सभी स्कूलों का होगा सुरक्षा ऑडिट, पोक्सो नियमों की अनदेखी पर होगी कड़ी कार्रवाई

उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने शिक्षा विभाग, पुलिस और महिला एवं बाल विकास विभाग को दिए निर्देश; स्कूलों के आसपास बढ़ेगी सुरक्षा, शिकायत निवारण तंत्र की होगी समीक्षा

नेहा फौजदार, आईआईएमटी न्यूज, नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। दिल्ली के सभी सरकारी और निजी स्कूलों का व्यापक सुरक्षा ऑडिट कराया जाएगा। इसके साथ ही बाल यौन अपराध संरक्षण अधिनियम (पोक्सो) के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने बुधवार को लोकनिवास में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में यह निर्देश दिए। बैठक में दिल्ली पुलिस आयुक्त, शिक्षा निदेशक, महिला एवं बाल विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी सहित कई प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।

बैठक के दौरान उपराज्यपाल ने स्पष्ट कहा कि बच्चों की सुरक्षा, सम्मान और गरिमा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि स्कूल केवल शिक्षा के केंद्र नहीं हैं, बल्कि बच्चों के सुरक्षित और स्वस्थ विकास का आधार भी हैं। ऐसे में यह सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है कि प्रत्येक छात्र भयमुक्त और सुरक्षित वातावरण में शिक्षा प्राप्त कर सके।

उपराज्यपाल ने शिक्षा विभाग को निर्देश दिया कि दिल्ली के सभी स्कूलों में पोक्सो एक्ट के तहत निर्धारित नियमों और दिशा-निर्देशों के अनुपालन की विस्तृत जांच कराई जाए। इस जांच में स्कूलों की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी, शिक्षकों और कर्मचारियों की पृष्ठभूमि जांच, छात्र सुरक्षा से जुड़े जागरूकता कार्यक्रमों तथा शिकायत निवारण प्रणाली की समीक्षा की जाएगी। जिन संस्थानों में सुरक्षा मानकों या कानूनी प्रावधानों के पालन में कमी पाई जाएगी, उनके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि स्कूलों में बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण व्यवस्था विकसित की जाएगी। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि सुरक्षा ऑडिट केवल औपचारिकता न बनकर एक प्रभावी प्रक्रिया हो, जिससे संभावित जोखिमों की पहचान कर समय रहते उन्हें दूर किया जा सके। प्रशासन का मानना है कि नियमित निगरानी से स्कूलों में जवाबदेही बढ़ेगी और सुरक्षा व्यवस्था अधिक मजबूत होगी।

छात्रों की सुरक्षा को लेकर दिल्ली पुलिस की भूमिका को भी और सक्रिय बनाने पर जोर दिया गया। उपराज्यपाल ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि स्कूल परिसरों के आसपास विशेष निगरानी रखी जाए। विशेष रूप से स्कूल खुलने और छुट्टी होने के समय पुलिस की मौजूदगी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। उन स्थानों पर भी अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी, जहां बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं आवागमन करते हैं। प्रशासन का मानना है कि पुलिस की सक्रिय उपस्थिति से अभिभावकों और छात्रों में सुरक्षा का विश्वास मजबूत होगा।

बैठक में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई। उपराज्यपाल ने कहा कि छेड़छाड़, उत्पीड़न और बाल अपराधों के मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी। ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई और दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी बच्चे को असुरक्षित महसूस करने की स्थिति में नहीं छोड़ा जा सकता और प्रशासन इस दिशा में हर संभव कदम उठाएगा।

इसके अलावा शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा दिल्ली पुलिस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान हो और शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। विभागीय तालमेल मजबूत होने से मामलों के समाधान में तेजी आएगी और बच्चों की सुरक्षा के लिए प्रभावी तंत्र विकसित होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि राजधानी में स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था का व्यापक ऑडिट कराने का निर्णय बच्चों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। इससे न केवल स्कूलों में सुरक्षा मानकों का स्तर बेहतर होगा, बल्कि अभिभावकों का भरोसा भी बढ़ेगा। प्रशासन को उम्मीद है कि इस पहल से दिल्ली के शैक्षणिक संस्थानों में अधिक सुरक्षित और संवेदनशील वातावरण तैयार होगा, जहां बच्चे बिना किसी भय और चिंता के अपने भविष्य का निर्माण कर सकेंगे।

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