क्या तकिए के फोन रखकर सोना, बन सकता है मौत का कारण ?

रोशनी शंकर (ग्रेटर नोएडा)

आजकल ज़्यादातर लोग सोते समय मोबाइल फोन को अपने सिरहाने या तकिए के पास रखते हैं। ऐसे में यह सवाल अक्सर उठता है कि क्या फोन की किरणों (रेडिएशन) से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। इसे लेकर कई तरह की आशंकाएं लोगों के मन में बनी रहती हैं, लेकिन विशेषज्ञों की राय इससे थोड़ी अलग है।

डॉक्टरों के अनुसार मोबाइल फोन गैर-आयनीकरण (नॉन-आयोनाइज़िंग) किरणें उत्सर्जित करते हैं, जो बेतार इंटरनेट (वाई-फाई) या एफएम रेडियो जैसी तरंगों की श्रेणी में आती हैं। ये डीएनए को नुकसान नहीं पहुंचातीं, इसलिए कैंसर की वजह बनने का कोई ठोस प्रमाण अब तक सामने नहीं आया है। इसके उलट एक्स-रे और अल्ट्रावॉयलेट किरणें (यूवी रेज़) जैसी आयनीकरण किरणें ही कैंसर के लिए जिम्मेदार मानी जाती हैं। भले ही कैंसर का सीधा खतरा न हो, लेकिन मोबाइल फोन का अधिक उपयोग कई समस्याओं को जन्म देता है। लगातार स्क्रीन देखने से सिरदर्द, नींद की कमी, तनाव और ध्यान भटकने जैसी दिक्कतें बढ़ती हैं। साथ ही देर रात फोन इस्तेमाल करने से नींद का चक्र पूरी तरह बिगड़ जाता है।

डॉक्टर सलाह देते हैं कि कॉल के दौरान कान की मशीन/तार वाले फोन (ईयरफोन) का इस्तेमाल करें और रात में मोबाइल को अपने बिस्तर से दूर रखें। सोने से कम से कम एक घंटा पहले फोन का उपयोग बंद कर देना चाहिए। स्क्रीन देखने का समय सीमित रखना और नियमित बिना-फोन समय बनाना मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य, दोनों के लिए फायदेमंद है।

डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी तरह की समस्या या लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।

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