सुधार, तकनीक और चुनौतियों के बीच, भारत के लिए निर्णायक साल रहा 2025!
रोशनी शंकर (ग्रेटर नोएडा)
2025 भारत के लिए बड़े नीतिगत बदलावों और तकनीकी प्रगति का वर्ष बनकर सामने आया। इस साल सरकार ने मध्यम वर्ग को बड़ी राहत देते हुए आयकर व्यवस्था में ऐतिहासिक सुधार किए। नई कर व्यवस्था के तहत 12 लाख रुपये तक की वार्षिक आय को पूरी तरह कर-मुक्त किया गया। पुराने जटिल कानूनों की जगह आयकर अधिनियम, 2025 लागू हुआ, जिससे कर स्लैब सरल हुए और अनुपालन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनी। विशेषज्ञों के अनुसार इससे उपभोक्ता खर्च बढ़ा और अर्थव्यवस्था को गति मिली।
तकनीक के मोर्चे पर 2025 को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के लिए मील का पत्थर माना गया। AI ने स्वास्थ्य क्षेत्र में ऑपरेशन थिएटर तक अपनी पहुंच बनाई, जहां यह सर्जनों की सहायता करता दिखा। मनोरंजन और डिजिटल सेवाओं में भी AI ने क्रांति लाई, सपनों जैसे वीडियो बनाना, ऑनलाइन बुकिंग में मोलभाव करना और वर्चुअल अनुभवों के जरिए नई संभावनाएं खोलना इसकी मिसाल रहे। अंतरिक्ष क्षेत्र में इसरो ने ‘ब्लू बर्ड ब्लॉक टू’ जैसे भारी उपग्रह को सफलतापूर्वक स्थापित कर भारत की तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन किया। नागरिक-केंद्रित सुधारों के तहत GST प्रणाली को और सरल किया गया, बीमा क्षेत्र में 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति दी गई, जबकि श्रम और परमाणु ऊर्जा कानूनों में भी बड़े बदलाव हुए। इन सुधारों का उद्देश्य निवेश बढ़ाना, रोजगार सृजन को प्रोत्साहन देना और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को मजबूती देना रहा। हालांकि, मुद्रास्फीति और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आर्थिक संतुलन बनाए रखने के लिए RBI पर नीतिगत दबाव भी बना रहा।
सकारात्मक उपलब्धियों के बावजूद, 2025 कुछ दुखद घटनाओं के लिए भी याद किया गया। साल की शुरुआत में उत्तर प्रदेश के महाकुंभ में भगदड़ और बाद में अहमदाबाद में हुई विमान दुर्घटना ने देश को झकझोर दिया। इन त्रासदियों ने आपदा प्रबंधन और सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े किए। कुल मिलाकर, 2025 भारत के लिए आशा, सुधार और तकनीकी प्रगति का वर्ष रहा, जिसने भविष्य की दिशा तय की, भले ही कुछ दर्दनाक घटनाओं ने इस यात्रा को चुनौतीपूर्ण बना दिया।
