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वायु प्रदूषण से बढ़ रहा लंग कैंसर का खतरा, PM2.5 कण और जहरीले तत्व बने बड़ी वजह

रोशनी शंकर (ग्रेटर नोएडा)

भारत में बढ़ता वायु प्रदूषण अब गंभीर स्वास्थ्य चिंता का कारण बनता जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार हवा में मौजूद बेहद छोटे PM2.5 कण फेफड़ों की गहराई तक पहुंचकर सेल्स को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे लंग कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है। दुनियाभर में कैंसर से होने वाली मौतों में लंग कैंसर प्रमुख कारणों में शामिल है और भारत में भी इसके मामलों में तेजी दर्ज की जा रही है।

लंग कैंसर की मुश्किल यह है कि इसके शुरुआती लक्षण अक्सर स्पष्ट दिखाई नहीं देते। बीमारी आगे बढ़ने पर लगातार खांसी, खांसी में खून, सांस लेने में परेशानी, आवाज में भारीपन, सीने में दर्द, वजन घटने और लगातार थकान जैसे संकेत उभरते हैं। कई मरीजों में बार-बार निमोनिया या ब्रोंकाइटिस होना भी इस बीमारी की ओर संकेत करता है, जिनका समय पर इलाज बेहद जरूरी होता है। चिकित्सकों के अनुसार प्रदूषित हवा में सिर्फ धूल नहीं, बल्कि बेंजीन, फॉर्मलडिहाइड, आर्सेनिक और पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन जैसे कार्सिनोजेनिक रसायन भी मौजूद होते हैं, जो फेफड़ों के डीएनए को डैमेज कर सकते हैं। लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से फेफड़ों में लगातार सूजन बनी रहती है, जो सेल्स को असामान्य तरीके से बढ़ने के लिए प्रेरित कर सकती है और अंततः कैंसर का रूप ले सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण शरीर की प्राकृतिक रोग-प्रतिरोधक क्षमता को भी कमजोर कर देता है, जिससे कैंसर-रोधी सुरक्षा घट जाती है। धूम्रपान करने वालों में यह खतरा और अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि धुआं और प्रदूषण दोनों मिलकर फेफड़ों को गंभीर रूप से प्रभावित करते हैं।

डिस्क्लेमर: यह आर्टिकल सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी तरह की समस्या या लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।

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