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सुप्रीम कोर्ट ने पलटा कर्नाटक हाई कोर्ट का फैसला

रोशनी शंकर, ग्रेटर नोएडा

आत्महत्या के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को पलट दिया। कर्नाटक हाई कोर्ट द्वारा एक महिला को धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) के तहत तीन साल की सजा सुनई गई थी। जिसे जस्टिस बीवी नागरत्ना और केवी विश्वनाथन की बेंच ने पलट दिया।

यह मामला आत्महत्या के लिए उकसाने से जुड़ा हुआ था। जो कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने के तहत आया था। जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि, रोजमर्रा के झगड़े हमारी जिंदगी का एक हिस्सा होते हैं। जब अपीलकर्ता का परिवार और पीड़ित का परिवार आपस में विवाद कर रहे थे तो कोई भी प्रमाण नहीं था कि अपीलकर्ता ने जानबूझकर पीड़ित को आत्महत्या के लिए प्रेरित किया हो।

आपको बता दें, आरोपी महिला को IPC की धारा 306 के तहत दोषी ठहराया गया था, जबकि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(2)(v) से उसे बरी कर दिया गया था।

क्या है IPC की धारा 306 ?

यदि किसी व्यक्ति द्वारा, किसी व्यक्ति को आत्महत्या करने के लिए उकसाया जाता है तो उस व्यक्ति को IPC की धारा 306 के तहत दंडित किया जाता है। जो कोई ऐसी आत्महत्या के लिए उकसाता है, उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास से दण्डित किया जाएगा, जिसे दस वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है, और वह जुर्माने के लिए भी उत्तरदायी होगा।

इस फैसले को न्यायपालिका के एक अहम कदम के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि यह बताता है कि सजा केवल ठोस प्रमाणों के आधार पर ही दी जानी चाहिए।

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