अनुराग पुंढ़ीर, आईआईएमटी न्यूज़, ग्रेटर नोएडा
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में बढ़ती लावारिस कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए एमसीडी (नगर निगम दिल्ली) अब सख्त कदम उठाने जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद एमसीडी ने नसबंदी अभियान और शेल्टर होम निर्माण की गति तेज करने का फैसला किया है।
शनिवार को सत्या शर्मा एमसीडी के पांच नसबंदी केंद्रों का निरीक्षण करेंगी और उनकी कार्यप्रणाली की समीक्षा करेंगी। इसके साथ ही, खतरनाक कुत्तों के लिए बनाए जाने वाले शेल्टर होम की स्थापना हेतु विभिन्न इलाकों में जमीन का सर्वेक्षण भी किया जाएगा।
फिलहाल एमसीडी के पास कुल 20 नसबंदी केंद्र हैं, जिनमें से केवल 13 ही सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। संसाधनों और क्षमता की कमी के कारण अभियान की रफ्तार धीमी पड़ी हुई है, जिसके चलते राजधानी में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। दिल्लीवासियों की शिकायतें भी बढ़ रही हैं—बच्चों और बुजुर्गों पर हमले, कॉलोनियों में झुंड बनाकर घूमने जैसी घटनाएं चिंता का विषय बन गई हैं।
दिल्ली में अभी तक एमसीडी के पास लावारिस और खतरनाक कुत्तों को रखने के लिए कोई स्थायी शेल्टर होम नहीं है। पकड़े गए कुत्तों को अस्थायी व्यवस्थाओं में रखा जाता रहा है, जहां न तो पर्याप्त देखभाल हो पाती है और न ही नियंत्रण। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पहली बार एमसीडी शेल्टर होम का निर्माण करेगी। इसमें खतरनाक कुत्तों को सुरक्षित रखने के साथ-साथ बेहतर इलाज, देखभाल और पुनर्वास की व्यवस्था होगी। इससे एक ओर नागरिकों को राहत मिलेगी और दूसरी ओर पशु-कल्याण का ध्यान रखा जाएगा।
स्थायी समिति ने इस समस्या पर काबू पाने के लिए पहले ही एक उप समिति गठित कर रखी है, जो स्थिति का अध्ययन कर नीति निर्माण के लिए सुझाव दे रही है। अब कोर्ट के आदेशों को ध्यान में रखते हुए एमसीडी ने ठोस और व्यापक रणनीति पर अमल शुरू कर दिया है।
सत्या शर्मा ने स्पष्ट किया कि निरीक्षण के दौरान डॉक्टरों और स्टाफ की उपलब्धता, दवाओं और उपकरणों की स्थिति, तथा प्रतिदिन होने वाले ऑपरेशनों की संख्या की बारीकी से जांच होगी। यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई गई तो जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य सिर्फ आदेशों का पालन करना नहीं है, बल्कि दिल्ली की जनता को सुरक्षित और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना है।”
👉 इस पूरे अभियान से उम्मीद की जा रही है कि न सिर्फ लावारिस कुत्तों की संख्या नियंत्रित होगी बल्कि राजधानी में लोगों की सुरक्षा और पशु-कल्याण दोनों सुनिश्चित होंगे।

