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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: SIT की रिपोर्ट में बड़े खुलासे, ट्रस्ट पदाधिकारियों पर उठे सवाल; 25-30 लोगों की भूमिका संदिग्ध

चढ़ावा चोरी, कमीशनखोरी और नियुक्तियों में अनियमितताओं के आरोप; ट्रस्ट के पुनर्गठन और विस्तृत ऑडिट की सिफारिश

रामशंकर, आईआईएमटी न्यूज, अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। रिपोर्ट में चढ़ावे की राशि में कथित गड़बड़ियों, कमीशनखोरी, नियुक्तियों में अनियमितताओं और निगरानी तंत्र की खामियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट मंगलवार सुबह अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद को सौंपी गई, जिसे अब मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।

एसआईटी में शामिल लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी रेंज किरन एस और विशेष सचिव वित्त नील रतन ने छह दिनों तक अयोध्या में रहकर मामले की विस्तृत जांच की। जांच के दौरान कर्मचारियों, अधिकारियों और संबंधित पक्षों से पूछताछ की गई तथा कई दस्तावेज और साक्ष्य एकत्र किए गए।

सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में राम मंदिर ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों की भूमिका और जिम्मेदारी पर सवाल उठाए गए हैं। कुछ लोगों पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से अनियमितताओं में शामिल होने का संदेह जताया गया है, जबकि कुछ को निगरानी में लापरवाही का दोषी माना गया है। रिपोर्ट में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, पदाधिकारी अनिल मिश्रा और निर्माण सहायक गोपाल राव के नामों का उल्लेख होने की चर्चा है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच रिपोर्ट के बाद ही सामने आएंगे।

जांच रिपोर्ट में कुछ पदाधिकारियों के रिश्तेदारों और करीबी लोगों का भी जिक्र किया गया है। आरोप है कि चढ़ावे की गणना और संबंधित व्यवस्थाओं में ऐसे लोगों की नियुक्तियां हुईं, जिनके ट्रस्ट पदाधिकारियों से करीबी संबंध थे। इससे पारदर्शिता और जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न खड़े हुए हैं।

एसआईटी को प्रारंभिक जांच में करीब 25 से 30 लोगों की भूमिका संदिग्ध दिखाई दी है। माना जा रहा है कि इन व्यक्तियों के खिलाफ जल्द ही एफआईआर दर्ज करने की संस्तुति की जा सकती है। रिपोर्ट में कथित तौर पर कुछ पदाधिकारियों पर कमीशन लेने के आरोपों का भी उल्लेख किया गया है, जिसकी विस्तृत जांच अभी जारी है।

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि मंदिर में आने वाले चढ़ावे की गणना प्रक्रिया में कई खामियां थीं। दानपात्रों से निकाली गई राशि को एक साथ एकत्रित कर गिना जाता था, जिससे वास्तविक कुल राशि का स्वतंत्र सत्यापन कठिन हो जाता था। आरोप है कि इसी प्रक्रिया का लाभ उठाकर कुछ कर्मचारियों ने गिनती के दौरान रकम में हेरफेर किया।

रिपोर्ट के अनुसार चढ़ावे की राशि में गड़बड़ी का यह कथित सिलसिला करीब सवा वर्ष तक चलता रहा। विशेष रूप से महाकुंभ और माघ मेले जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने से चढ़ावे की रकम में भारी वृद्धि हुई। इसी अवधि में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर धनराशि के गबन की आशंका जताई गई है।

जांच में यह भी पाया गया कि चढ़ावे की गिनती का कार्य भारतीय स्टेट बैंक से जुड़ी एक आउटसोर्सिंग व्यवस्था के माध्यम से कराया जा रहा था। आरोप है कि कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव था और प्रभावशाली लोगों के करीबी व्यक्तियों को प्राथमिकता दी गई। इसी वजह से पूरे तंत्र में जवाबदेही कमजोर हो गई।

एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में राम मंदिर ट्रस्ट के पुनर्गठन, चढ़ावे की गणना व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने तथा स्वतंत्र एजेंसी से विस्तृत ऑडिट कराने की सिफारिश की है। साथ ही सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की भी आवश्यकता बताई गई है।

फिलहाल यह प्रारंभिक जांच रिपोर्ट है और एसआईटी ने स्पष्ट किया है कि विस्तृत जांच अगले दो सप्ताह में पूरी की जाएगी। इसके बाद और भी तथ्य तथा साक्ष्य सामने आ सकते हैं। शासन स्तर पर रिपोर्ट की समीक्षा शुरू हो गई है और माना जा रहा है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के साथ-साथ मंदिर प्रशासन में कई महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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