रेलवे की फ्री वाई-फाई से एक कुली बना आईएएस

आईएएस

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अनुराग दुबे : भारत के प्रत्येक छात्रों के मन में आईएएस अधिकारी बनने का सपना होता है। एक जिलाधिकारी प्रशासनिक सेवा का सबसे अच्छा पोस्ट है। प्रशासनिक सेवा की तैयारी करने वाले अपने-आप में एक कहानी बन जाते हैं। एक ऐसी ही कहानी है एक कुली की, जिसने अपने जिंदगी में आईएएस बनने का सपना पाला।

एक कहावत है- कौन कहता है कि आसमां में छेद नहीं होता है,

एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो।

कुछ ऐसी ही इरादों में दम था, एर्नाकुलम रेलवे स्टेशन पर काम करने वाले आईएएस श्रीनाथ के सपनों का। श्रीनाथ ने अपने घर की सारी जिम्मेदारियों को संभालते हुए आईएएस बन कर ये दिखा दिया कि अगर इरादे मजबूत हो तो कुछ भी असंभव नही है। श्रीनाथ के पास संसाधनों की कमी थी, इसके बावजूद भी उन्होंने संसाधनों की कमी को अपने जीवन में रोड़ा नही बनने दिया।

संघ लोक सेवा आयोग के इस परीक्षा में हर साल लगभग लाखों की संख्या में अभ्यर्थी अपनी किस्मत अजमाते हैं। UPSC  की परीक्षा की तैयारी हेतु अभ्यर्थी बड़े-बड़े कोचिंग संस्थान में पढ़ते हैं, लाखो की खर्च करते हैं। श्रीनाथ ने बिना किसी कोचिंग की सहायता के अपितु खुद के सेल्फ स्टडी के दम पर upsc की परीक्षा को निकाला है। श्रीनाथ केरल के रहने वाले हैं। केरल के स्टेट PCS  में भी श्रीनाथ का जलवा दिखा था।

श्रीनाथ ने आपदा में अवसर वाली कहावत को सिद्ध करते हुए, रेलवे के फ्री वाई-फाई को ही अपना ढाल बना लिया। रेलवे की फ्री वाई-फाई उनके लिए वरदान साबित हुई, उन्होंने ऑनलाईन पढाई कर अपने सपने को हासिल किया और आईएएस बने।

मंजिल उन्ही को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है,

पंखो से कुछ नहीं होता हौसले से उड़ान होती है।