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बूंद-बूंद पानी को तरस रहा पाकिस्तान, बौखलाहट में अपनी हैसियत भूले पाकिस्तान के मंत्री; क्यों दी हाथ काटने की धमकी?

मीनाक्षी आईआईएमटी न्यूज

क्या सिंधु जल संधि को लेकर पाकिस्तान की बेचैनी अब खुलकर सामने आने लगी है? आखिर पाकिस्तान के मंत्री भारत को ‘हाथ काटने’ जैसी धमकी क्यों दे रहे हैं?

दरअसल, भारत द्वारा पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को स्थगित किए जाने के बाद पाकिस्तान में जल संकट और चिंता बढ़ गई है। सिंध और बलूचिस्तान में पानी की भारी कमी के बीच पाक नेताओं की अनर्गल बयान देना शुरू कर दिया है।

भारत द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित किए जाने के बाद पाकिस्तान की बेचैनी लगातार बढ़ती दिख रही है। एक ओर पाकिस्तान के कई इलाके गंभीर जल संकट से जूझ रहे हैं और किसान सिंचाई के लिए पानी की कमी का सामना कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वहां के मंत्री भारत को धमकियां देने में जुटे हैं। पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसद्दिक मलिक ने भारत को चेतावनी देते हुए कहा है कि जो भी हमारे पानी को छुएगा, उसके हाथ काट दिए जाएंगे।

भारत द्वारा सिंधु जल संधि को स्थगित किए जाने के बाद पाकिस्तान की बेचैनी लगातार बढ़ती दिख रही है। एक ओर पाकिस्तान के कई इलाके गंभीर जल संकट से जूझ रहे हैं और किसान सिंचाई के लिए पानी की कमी का सामना कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वहां के मंत्री भारत को धमकियां देने में जुटे हैं। पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसद्दिक मलिक ने भारत को चेतावनी देते हुए कहा है कि जो भी हमारे पानी को छुएगा, उसके हाथ काट दिए जाएंगे।

पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने भी भारत को लेकर कहा कि पड़ोसी देश के प्रधानमंत्री पाकिस्तान को पानी की एक बूंद भी नहीं देने की बात कर रहे। उन्होंने यह भी कहा कि सिंधु जल संधि को कोई एक देश एकतरफा समाप्त नहीं कर सकता। भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद संधि को स्थगित करने का फैसला लिया था और साफ कर दिया था कि आतंक और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते।

पाकिस्तान इस समय गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है। खासकर सिंध और बलूचिस्तान के कई हिस्सों में पानी की भारी कमी देखी जा रही है। इन क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर है, लेकिन सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। कई किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द स्थिति नहीं सुधरी, तो फसलों को भारी नुकसान हो सकता है। जल संकट का असर केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे लाखों लोगों की आजीविका भी प्रभावित हो रही है।

ये भी माना जा रहा है कि पाकिस्तान के नेताओं के हालिया बयान देश के भीतर बढ़ते दबाव और संकट की ओर इशारा करते हैं। एक ओर देश आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और जल संकट से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर भारत के सख्त रुख ने उसकी चिंताएं और बढ़ा दी हैं। ऐसे में पाकिस्तान के नेताओं की तीखी बयानबाजी को घरेलू दबाव से ध्यान भटकाने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।

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