मीनाक्षी जागलान आईआईएमटी न्यूज मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध की आवाज तो एक है, लेकिन प्रदर्शनकारी एक साथ सामने नहीं आए। नई दिल्ली में इंडिया ब्लॉक से लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी), आम आदमी पार्टी (आप) और कांग्रेस व वाम दलों से जुड़े संगठनों ने अपने-अपने स्तर पर मोर्चा खोल रखा है। प्रदर्शनकारियों का यही बिखराव दिल्ली पुलिस के लिए भी बड़ी चुनौती बना है। आंदोलन की केंद्रीय आवाज न होने से पुलिस को हर समूह की गतिविधि पर हर पल नजर रखनी पड़ रही है। प्रदर्शनों से निपटने में पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती विरोध के किसी एक केंद्र का न होना है। आम तौर पर जब किसी आंदोलन का स्थान, समय और नेतृत्व तय होता है, तो पुलिस अपनी तैनाती और निगरानी उसी के अनुरूप कर सकती है। लेकिन अलग-अलग संगठनों के स्वतंत्र कार्यक्रमों के कारण मुश्किले बढ़ रही है। आम तौर पर आंदोलनों में नेतृत्व और कार्यक्रम की स्पष्ट रूपरेखा होने से पुलिस को अपनी रणनीति बनाने में आसानी होती है। इस बार अलग-अलग संगठन अपने स्तर पर विरोध कर रहे हैं। बिना अनुमति प्रदर्शन की कोशिशों के कारण भी निगरानी और कानून-व्यवस्था बनाए रखने का काम कठिन हो रहा है।
अनेक प्रदर्शन बने दिल्ली पुलिस के लिए चुनौती,अलग अलग संगठन कर रहे प्रदर्शन

