अमेरिकी विशेषज्ञों के शोध में बड़ा खुलासा, संक्रमण की उत्पत्ति स्थल का निरीक्षण नहीं हुआ तो कोविड-26 और कोविड-32 आने की संभावना

आईआईएमटी न्यूज डेस्क, ग्रेटर नोएडा



विश्व में कोरोना वायरस का खौफ अभी हटा नहीं था हाल ही ने तीसरी लहर का संकेत मिलने लगा। कोरोना कई प्रकार से मानव जीवन पर घातक प्रहार करता है। कहीं ब्लैक फंगस तो कहीं व्हाइट फंगस मानव जीवन को मौत की चादर उढाने में लगा है। इस पर अभी तक कई शोध किए जा चुके है। बता दें कि वैक्सीन की करीब आठ प्रकार की सफल ट्रायल होने के बाद टीकारण भी चलाया जा रहा है। पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को सीधा जिम्मेदारी ठहराया था। लेकिन वर्तमान राष्ट्रपति बाईडन ने अपना फरमान बदल दिया। उन्होंने चीन सरकार से मदद की मांग की। आपको बता दें कि बाईडन ने संक्रमण की उत्पत्ति तक पहुंचने में कई जांच टीमों को गठित किया। विशेषज्ञों ने यह कहा है कि भविष्य में कोरोना महामारी से बचने के लिए दुनिया को इसकी उत्पत्ति स्थल का पता लगाने के लिए चीन की सरकार की ओर से सहयोग की जरूरत है। अगर ऐसा नहीं होता है तो दुनिया को कोविड-26 और कोविड-32 के लिए तैयार रहना होगा। उल्लेखनीय है कि ट्रंप प्रशासन में फूड ऐंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के कमिश्नर रहे साथ ही फाइजर कंपनी के बोर्ड सदस्य स्कॉट गॉटलिब का कहना है कि चीन की वुहान लैब से कोरोना वायरस के निकलने को लेकर अब काफी जानकारियां हैं हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि चीन के शहर वुहान से इस ख़तरनाक संक्रमण की उत्पत्ति हुई। दूसरी ओर, इसकी भी पुष्टि नहीं हुई है कि वायरस जानवरों से इंसानों में पहुंचा। लगभग डेढ़ साल पहले पहली बार यह वायरस चीन के वुहान सीफूड मार्केट से फैलना शुरू हुआ था लेकिन आज तक यह पता नहीं लग सका है कि यह वायरस आखिर कहां से पनपा।
बता दें कि इस बहस की शुरुआत एक बार फिर से तब हुई जब वॉल स्ट्रीट जर्नल ने 23 मई को अपनी एक रिपोर्ट में यह दावा किया कि कोरोना वायरस फैलने से लगभग एक महीने पहले यानी नवंबर 2019 में ही चीन की वुहान लैब के कुछ शोधकर्ता ठीक उसी तरह के लक्षणों के साथ बीमार पड़े थे, जैसे कोरोना के होते हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि बीमार शोधकर्ताओं को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। होटेज ने कहा कि अमेरिकी वैज्ञानिकों को चीनी लैब का परीक्षण करने की अनुमति मिलनी चाहिए। जानवर और इंसान के खून से जांच करने की अनुमति होनी जरूरी है। उनका कहना है कि हमें चीन के हुबेई प्रांत में वैज्ञानिकों, महामारीविदों, वायरलॉजिस्ट, बैट इकोलॉजिस्ट की एक टीम छह महीने या साल भर के लिए चाहिए। इस मामले में चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने कहा था कि बाइडेन की ओर से जांच के आदेश देना अमेरिका की राजनीति है। टेक्सस चिल्ड्रेन हॉस्पिटल सेंटर फॉर वैक्सीन डेवलेपमेंट के सह-निदेशक पीटर होटेज़ ने कहा कि अगर यह पता नहीं लगता है कि महामारी की शुरुआत कहां से हुई, तो इससे दुनिया पर भविष्य में इस तरह के कहर की आशंका बढ़ती है। होटेज़ ने कहा, 'जब तक हम यह न जान लें कि कोविड-19 कहां से पनपा तब तक आगे कोविड-26 और कोविड-32 का सामना भी करना पड़ेगा।