दाल में तड़का लगाना होगा सस्ता, कीमतों पर काबू पाने के लिए सरकार ने उठाए कई कदम

अनन्या सिंह, आईआईएमटी न्यूज डेस्क, ग्रेटर नोएडा



कोरोना महामारी और लॉकडाउन के दौरान खाने-पीने के सामानों की कीमतों में बढ़ोतरी ने आम लोगों की परेशानियां और भी ज्यादा बढ़ा दी हैं। सरकार के आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले एक ही साल में खाने-पीने के सामान में तेल से लेकर अंडा, राजमा, दाल सबकुछ महंगे हो चुके हैं। अनाज पर महंगाई की मार पड़ रही है। दालों का भाव बहुत बढ़ गया है। अरहर की दाल 30 रुपए प्रति किलो महंगी हो गई है। उरद, मूंग व मसूर के रेट भी आसमान छू रहे हैं। ऐसे में खाने का जायका फीका पड़ने लगा है। जनता दालों के विकल्प के तौर पर सब्जियों का ज्यादा इस्तेमाल करने को मजबूर हो गई है।
हालांकि सरकार के हस्तक्षेप के बाद दालों के खुदरा दामों में गिरावट देखने लगा है। केन्द्रीय खाद्य सचिव सुधांशु पांडे ने सोमवार को बताया कि दलहन के थोक, खुदरा विक्रेताओं, मिलों और आयातकों पर सरकार की ओर से हाल में लगाई गई स्टॉक सीमा का खुदरा दाम पर और प्रभाव पड़ेगा। खाद्य सचिव ने वीडियो कांफ्रेन्स के जरिये संवाददाता सम्मेलन में कहा कि मसूर दाल को छोड़कर, अन्य सभी दालों के दाम पिछले 4- 5 सप्ताह से खुदरा और थोक बाजारों में लगातार कम हो रहे हैं। परंपरागत तौर पर देश में मसूर का उत्पादन कम होता रहा है इसलिए इसका आयात करना पड़ता है।
इस साल मसूर का आयात बढ़ा है और सरकार को उम्मीद है कि इसके दाम पर भी नरमी के रुख का असर होगा। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक राजधानी में इन दिनों चना दाल का दाम 73 रुपये किलो के करीब चल रहा है। वहीं मसूर दाल का दाम 87 रुपये किलो, मूंग का 100 रुपये किलो, तूर दाल का दाम 110 रुपये किलो और उड़द दाम का दाम 114 रुपये किलो के आसपास चल रहा है। दालों के दामों पर अंकुश लगाने के लिये सरकार के कदमों की जानकारी देते हुये सचिव ने कहा कि उड़द और मूंग के आयात को बढ़ावा देने के लिये आयात नीति में बदलाव किया गया है। इनका आयात प्रतिबंधित श्रेणी से हटाकर इस साल अक्टूबर तक के लिये मुक्त श्रेणी में डाल दिया गया है। इसी प्रकार, जमाखोरी को रोकने के लिये सरकार ने मूंग दाल को छोड़कर अन्य सभी दलहन पर अक्टूबर तक के लिये स्टॉक सीमा लागू की है।