रेमेडेसिवर को कोरोना प्रोटोकॉल से हटाने पर हो रहा विचार, विशेषज्ञ का दावा-"नहीं मिले प्रभाव के सबूत"

आईआईएमटी न्यूज डेस्क, ग्रेटर नोएडा



देश में आग की तरह फैल रहे कोरोना संकट के बीच बेहद ही चौंकाने वाली खबर सामने आई है। कोरोना से संक्रमित मरीजों को दिए जाने वाले इंजेक्शन रेमेडेसिवर को कोविड प्रोटोकॉल से हटाने पर विचार चल रहा है। दरअसल, गंगा राम अस्पताल के अध्यक्ष डॉ एस राणा ने दावा किया है कि कोरोना रोगियों के इलाज में इसकी प्रभावशीलता के कोई सबूत नहीं मिले हैं। इसलिये रेेमडेसिविर को भी जल्द ही कोविड-19 के इलाज से हटाने पर विचार किया जा रहा है।
गौरतलब है कि बीते दिन कोरोना संक्रमण से निजात पाने के लिए अपनाई गई प्लाज्मा थेरेपी को भी इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की सलाह के बाद इलाज के प्रोटोकॉल से हटा दिया गया था। इस पर डॉ राणा ने बताया, "प्लाज्मा थेरेपी में हम कोरोना से ठीक हो चुके व्यक्ति से एंटीबॉडी लेकर किसी दूसरे में ट्रांसफर करते हैं। लेकिन पिछले एक साल में हमने देखा कि प्लाज्मा देने के बाद भी कोरोना मरीज की स्थिति में कोई बदलाव नहीं होता है"। उन्होंने कहा कि "दूसरी बात यह है कि प्लास्मा आसानी से उपलब्ध भी नहीं है। प्लाज्मा थेरेपी की शुरुआत वैज्ञानिक आधार पर की गई थी लेकिन इसे अब प्रोटोकॉल से अलग तथ्यों के आधार पर किया गया है।