आज से अमेरिका का समय बढ़ा 1 घंटे आगे

आईआईएमटी न्यूज डेस्क, ग्रेटर नोएडा



18 वीं शताब्दी में अमेरीकी राष्ट्रपति बेंजामिन फ्रेंकलिन को एक बार महसूस हुआ कि वे घड़ी के अनुसार तय समय पर उठकर गर्मियों की सुबह काफी बर्बाद करते हैं। लेकिन उस वक़्त उनकी इस बात को ज्यादा तवज्जो नहीं मिली।
धीरे धीरे औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार के साथ लोगों को ये महसूस होने लगा कि उनका समय काफी बर्बाद होता है। जिसके नतीजतन जन्म हुआ "सन टाइम" का।
"सन टाइम" के तहत दो शहरों के बीच की दूरी में अंतर रखा जाता था। लेकिन इस तकनीक के इस्तेमाल से रेलवे कंपनियों को खासा दिक्कतों का सामना करना पड़ता था, ट्रेन तय समय पर दूसरे शहर नहीं पहुँच पाती थी। जिसके फलस्वरूप यह प्रणाली अनुपयोगी हो गई।
साल 1916 में जर्मनी ने समय को आगे बढ़ाने का महत्व समझा जिसके बाद तय किया गया कि गर्मियों में समय को एक तय अवधि में बढ़ाने के लिए प्रणाली बनाई जाए। जर्मनी की देखा-देखी अमेरिका ने भी 1948 में एक घंटे समय बढ़ाने की घोषणा करी।
बता दें, साल 2007 से अमेरिका में डीएसटी प्रणाली मार्च के दूसरे रविवार से लागू कर दी गई जो कि नवंबर के पहले रविवार को वापस ले ली जाती है।

डीएसटी प्रणाली है क्या?
19 वीं शताब्दी में पूरे साल समय का संतुलन बनाये रखने के लिए डेलाइट सेविंग टाईम यानी डीएसटी को लागू किया गया। इस प्रणाली के तहत अमेरिका में मार्च के दूसरे रविवार को रात 2 बजे घड़ी को एक घंटे आगे बढ़ाया जाता है जिसको नवंबर के पहले रविवार को वापस ले लिया जाता है।

डीएसटी के फायदे
साल 2008 में सुपरपावर अमेरिका के ऊर्जा विभाग की रिपोर्ट में कहा गया कि डीएसटी प्रणाली से देश 0.5 प्रतिशत बिजली रोज बचाता है। वहीं, कारोबारी समूह नेशनल एसोसिएशन ऑफ कनवीनियंस स्टोर्स ने बताया कि दिन के खत्म होते ही लोग घरों को जल्द ही लौट जाते हैं जबकि समय के बढ़ने से लोग देर तक बाहर रहते हैं। बाहर रहते हुए वे खरीददारी भी करते हैं जिससे आर्थिक विकास भी होता है।