कोरोना वैक्सीन के लिए पाक की मजबूरी या लापरवाही?

आईआईएमटी न्यूज डेस्क, ग्रेटर नोएडा



पड़ोसी देश पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कोरोना की मार झेल रही जनता को भगवान भरोसे छोड़ कर वैक्सीन न खरीदने का फैसला किया है। इमरान खान ने अपने बयान में कहा है कि, कोरोना से बचने के लिए हर्ड इम्यूनिटी और पड़ोसी देशों से मुफ्त में मिलने वाली वैक्सीन पर निर्भर रहा जाएगा। अब पाकिस्तान को कोरोना की मेड इन इंडिया वैक्सीन मुफ्त मिलेगी। यह वैक्सीन पाकिस्तान को ग्लोबल अलायंस फॉर वैक्सीन्स एंड इम्युनाइजेशन (GAVI) समझौते के तहत सप्लाई की जाएगी। अब सबसे, बड़ा सवाल यह उठता है कि, आखिर क्यों पाकिस्तान को मुफ्त कोरोना वैक्सीन के लिए दूसरे दशों पर निर्भर रहना पड़ रहा है? क्या पाकिस्तान दूसरे देशों पर वैक्सीनेशन के लोभ से आत्मसमर्पण कर रहा है, या फिर तकनीकी यंत्रों व लैबों से वंचित है?
क्यों पाकिस्तान कोरोना वैक्सीन खरीददारी का समझौता नहीं कर पाया?
पाकिस्तान के नेशनल टास्क फोर्स फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी के अध्यक्ष डॉक्टर अता-उर-रहमान ने अपने बयान में कहा कि, पाकिस्तान खरीददारी का समझौता इसलिए नहीं कर पा रहा है क्योंकि, कोई भी वैक्सीन तैयार करने वाली कंपनी पाकिस्तान का कोई भी बड़ा ऑर्डर लेने को तैयार नहीं है। सभी कंपनी की वैक्सीन तैयार करने की एक अपनी क्षमता होती है और उनके पास पहले से ही कई सारे ऑर्डर हैं। इसलिए वह कोई भी औपचारिक समझौता नहीं करना चाहते हैं।
क्यों कोई बड़ी कंपनी पाकिस्तान का ऑर्डर लेने को तैयार नहीं है?
• पाकिस्तान आर्थिक स्थिती में विश्व में 11वें स्थान पर है।
• कोरोना महामारी में पाकिस्तान को 1.3 मिलियन आर्थिक खामियाजा उठाना पड़ा। जो दूसरे देशों से 17 फीसदी अधिक है।
• कोरोना महामारी में बढ़ते मामलों की संख्या में नियंत्रण करने में पाकिस्तान काफी पीछे रहा है।
• विदेशी निवेश की कमी के कारण भी पाकिस्तान में जीडीपी पर भारी असर पड़ा।
• पड़ोसी देशों में आपसी मतभेद की प्रतिक्रियाएं अधिक होने से निवेशकों की संख्या कम हुई है।
• आयात-निर्यात में बॉर्डरों पर प्रतिबंध लगाया गया था।
सोशल मीडिया की स्थिती दूसरे देशों की तुलना में बहुत निंदनीय है।